नेपाल धधक रहा है: Gen Z के क्रोध से सुलगती सड़कें, 51 मौतें और 17,000 कैदियों का महा-पलायन!
12 सितंबर, 2025 को जारी पुलिस रिपोर्टों ने एक भयावह तस्वीर पेश की है: नेपाल इस सप्ताह हिंसक भ्रष्टाचार-विरोधी प्रदर्शनों की चपेट में पूरी तरह से जकड़ चुका है, जिसमें कम से कम 51 जानें जा चुकी हैं। देश में व्याप्त भीषण अराजकता की गवाही देते हुए, इन हताहतों में 21 प्रदर्शनकारी, 3 पुलिस अधिकारी, 9 कैदी और एक भारतीय महिला भी शामिल हैं।
जो आंदोलन कभी सरकारी भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंधों और कुशासन के खिलाफ जेनरेशन ज़ेड (Gen Z) के नेतृत्व में एक शांतिपूर्ण विरोध की चिंगारी था, वह अब ज्वालामुखी बन चुका है। अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के बाद, यह चिंगारी दावानल में बदल गई, जिसने जनता के गुस्से को इस कदर भड़काया कि व्यापक दंगे पूरे देश में फैल गए।
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9 सितंबर को, प्रदर्शनकारियों ने नेपाल के संसद भवन को आग के हवाले कर दिया – एक ऐसा क्षण जिसने इस संकट को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया। इस भीषण घटना और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आखिरकार अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। शांति और व्यवस्था बहाल करने के लिए, सेना को तुरंत तैनात किया गया, देश भर में कर्फ्यू लगा दिया गया और सड़कों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया गया।
लेकिन इस सब उथल-पुथल के बीच, एक और भयावह घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया – जेल तोड़ने की एक अभूतपूर्व लहर। नेपाल भर की जेलों से लगभग 17,000 कैदी, जिनमें कुख्यात अंडरवर्ल्ड के गुंडे और खतरनाक आतंकवादी भी शामिल थे, अपनी सलाखों को तोड़कर फरार हो गए। इस पलायन की शुरुआत ललितपुर की नक्खू जेल से हुई, जहाँ जेल में बंद राजनेता रवि लामिछाने के हज़ारों समर्थकों ने जेल परिसर पर धावा बोल दिया, उसे आज़ाद कराया और उनके साथ 900 से अधिक अन्य कैदियों को भी भागने में मदद की।
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जल्द ही, इसी तरह की जेल तोड़ने की घटनाएँ पूरे देश में एक भयावह लहर की तरह फैल गईं, जिससे कई जेलों में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई और कम से कम नौ कैदियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बढ़ती हिंसा और तोड़फोड़ के भयानक मंज़र के बावजूद, युवा प्रदर्शनकारियों ने इन विध्वंसक घटनाओं और लूटपाट से खुद को पूरी तरह अलग रखा है। उनका आरोप है कि ये कार्य शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में घुसपैठ करने वाले अवसरवादियों की देन हैं। वे बार-बार इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि उनके मूल आंदोलन का केंद्रबिंदु सिर्फ भ्रष्टाचार-विरोध और बेहतर प्रशासन है।
इसी बीच, नेपाली सेना ने पुष्टि की है कि उसने इस अशांति के दौरान लूटी गई 100 से ज़्यादा बंदूकें बरामद की हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में स्वचालित राइफलें देखी जाना एक बेहद चिंताजनक संकेत है, जो इन प्रदर्शनों के बढ़ते सैन्यीकरण और देश में शांति बहाली के हर प्रयास के लिए एक गंभीर बाधा खड़ी कर रहा है।
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