श्रीलंका में भारत का ‘मोबाइल’ अस्पताल: चक्रवात पीड़ितों के लिए 2200 से अधिक लोगों का जीवन रक्षक उपचार

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श्रीलंका में भारत का 'मोबाइल' अस्पताल: चक्रवात पीड़ितों के लिए 2200 से अधिक लोगों का जीवन रक्षक उपचार
Sri Lanka में भारत के ‘मोबाइल’ अस्पताल ने चक्रवात प्रभावित 2,200 से अधिक लोगों का इलाज किया

चक्रवात ‘दित्वा’ का कहर: भारत का ‘फील्ड’ अस्पताल बना जीवन रक्षक, 2200 से अधिक लोगों को मिली राहत

श्रीलंका में हाल ही में आए विनाशकारी चक्रवात ‘दित्वा’ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलन से हुए जान-माल के नुकसान के बीच, भारत की ओर से स्थापित एक मोबाइल ‘फील्ड’ अस्पताल प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस अस्पताल ने चक्रवात से प्रभावित 2,200 से अधिक लोगों को महत्वपूर्ण चिकित्सा देखभाल प्रदान की है।

संकट की घड़ी में भारत का साथ

चक्रवात ‘दित्वा’ के कारण आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने श्रीलंका के बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। कई जिले पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं, जिससे देश की आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है। ऐसे में, भारत ने न केवल इंजीनियरिंग सहायता और राहत सामग्री की आपूर्ति करके, बल्कि एक अत्याधुनिक ‘फील्ड’ अस्पताल स्थापित करके भी अपना समर्थन बढ़ाया है।

जीवन बचाने का अभियान

कैंडी के निकट महियांगनया में स्थापित इस भारतीय ‘फील्ड’ अस्पताल ने 5 दिसंबर से लगातार अपनी सेवाएं दे रहा है। इसने न केवल सामान्य चिकित्सा देखभाल प्रदान की है, बल्कि 67 छोटी शल्य क्रियाएं और तीन बड़ी सर्जरी भी सफलतापूर्वक की हैं। 78 सदस्यीय एक विशेष भारतीय चिकित्सा दल को भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान से श्रीलंका भेजा गया था, जो इस महत्वपूर्ण मिशन को अंजाम दे रहा है।

बहाली के प्रयास जारी

इसके साथ ही, भारतीय सेना के इंजीनियर श्रीलंकाई सेना के इंजीनियरों और सड़क विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर महत्वपूर्ण बहाली कार्यों में जुटे हुए हैं। किलिनोच्ची में परांथान-कराच्ची-मुल्लातिवु (ए35) सड़क पर चक्रवात से क्षतिग्रस्त हुए एक प्रमुख पुल को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। यह सड़क मार्ग प्रभावित क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क सूत्र है।

सामुदायिक भावना का उदाहरण

चक्रवात ‘दित्वा’ के कारण श्रीलंका में अब तक कम से कम 627 लोगों की जान जा चुकी है और 190 लोग अभी भी लापता हैं। ऐसे मुश्किल समय में, भारत द्वारा की गई यह सहायता न केवल भौतिक मदद है, बल्कि संकटग्रस्त लोगों के प्रति गहरी मानवीय संवेदना और मजबूत सामुदायिक भावना का भी प्रतीक है। भारतीय उच्चायोग ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर विदेश मंत्रालय के एक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला है।


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