अमेरिका-भारत व्यापारिक रिश्ते: टैरिफ की मार और भविष्य की राह
डेबोरा रॉस: नॉर्थ कैरोलाइना की कांग्रेसवुमन डेबोरा रॉस ने अमेरिका और भारत के मजबूत आर्थिक बंधन को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत की कंपनियों ने राज्य में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश करके लाइफ साइंस और टेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हजारों रोजगार सृजित किए हैं। इसके विपरीत, नॉर्थ कैरोलाइना की कंपनियां प्रतिवर्ष करोड़ों डॉलर का माल भारत को निर्यात करती हैं। ऐसे में, भारत पर लगाए गए टैरिफ सीधे तौर पर अमेरिकी व्यापार और रोजगार को चोट पहुंचा रहे हैं।
मार्क वीसी: कांग्रेसमैन मार्क वीसी ने भारत को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार बताते हुए टैरिफ नीति की आलोचना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये टैरिफ आम अमेरिकी नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ की तरह हैं, विशेषकर उस समय जब महंगाई पहले से ही लोगों को परेशान कर रही है। वीसी के अनुसार, यह नीति न तो अमेरिका के हित साधती है और न ही वैश्विक साझेदारी को मजबूत करती है।
राजा कृष्णमूर्ति: भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति को एक प्रतिगामी कदम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नीति के कारण आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो रही हैं, अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान हो रहा है, और उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं महंगी हो रही हैं। कृष्णमूर्ति का दृढ़ विश्वास है कि यदि इन टैरिफ को समाप्त कर दिया जाए, तो अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक और सुरक्षा संबंधी सहयोग कहीं अधिक सुदृढ़ हो सकता है।
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