ईरान पर ट्रंप का ‘इकोनॉमिक D-DAY’: मदद करने वाले देशों को मिलेगी भारी चोट, कहा- ‘ईरान की सैन्य ताकत हो चुकी है पंगु’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को खुली चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि जो भी देश ईरान को आर्थिक या लॉजिस्टिकल मदद मुहैया कराएगा, उसे “भारी आर्थिक नतीजों” का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ चल रहे अमेरिकी अभियान को दुनिया का “अब तक का सबसे जबरदस्त आर्थिक ऑपरेशन” बताया है।
हालांकि, 80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने इस सैन्य और आर्थिक दबाव के बीच खुद को सबसे बड़ा खिलाड़ी बताते हुए कहा कि उनके अलावा किसी और ने ईरान को डील करने का इतना बड़ा मौका नहीं दिया है। उन्होंने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायु सेना और पूरी सेना लगभग बर्बाद हो चुकी है और देश की स्थिति अब “बस एक धागे पर टिकी है।”
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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट में स्पष्ट किया कि “तेल की तस्करी, स्वैप लाइन, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस, जहाज़ों की रजिस्ट्री और फ्रंट कंपनियां — यह सब अब तुरंत बंद होने चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “आप जानते हैं कि आप कौन हैं। यह एक ‘इकोनॉमिक D-डे’ (निर्णायक आर्थिक दिन) होगा। ईरान के खतरे को अलग-थलग करने और उसे जड़ से मिटाने के लिए हमें अपने सभी सहयोगियों की ज़रूरत है। ये सनकी लोग अब बड़ी मुश्किल में हैं, और हमारा यह ऐतिहासिक कदम उन्हें और दुनिया भर में आतंक फैलाने की उनकी क्षमता को पूरी तरह पंगु बना देगा।” उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की किसी भी सूरत में इजाज़त नहीं दी जा सकती।
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ट्रंप का यह कड़ा रुख ईरान पर लगाए जा रहे ‘सख्त प्रतिबंधों’ के बीच आया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका मध्य पूर्व के इस देश पर दबाव और बढ़ा सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से ही टकराव का सिलसिला जारी है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी को एक बड़ी कामयाबी बताते हुए इसकी सराहना भी की।
उन्होंने कहा, “नौसैनिक नाकेबंदी बेहद असरदार रही है। यह काफी समय से लागू है, सिवाय उन चंद मौकों के जब हमने किसी डील के तहत इसे जानबूझकर खोला था। लेकिन वे डील वैसी नहीं निकली जैसा उन्होंने दावा किया था; वे कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। सच तो यह है कि नाकेबंदी 100% सफल रही है।”
हालाँकि, ट्रंप इस समय भारी दबाव में हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ के रास्ते खोल देता है, तो अमेरिका अपनी कार्रवाई को धीमा करने पर विचार कर सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि वह अमेरिका के साथ लंबे संघर्ष के लिए तैयार है और इस टकराव को 2028 तक, यानी ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने तक खींचने का दमखम रखता है।
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