अमेरिका के टैरिफ की भूल: चीन ने भारत के साथ रचा नया व्यापारिक इतिहास, अमेरिका की नींद उड़ी!
नई दिल्ली: अमेरिका ने सोचा था कि ऊंचे टैरिफ लगाकर चीन को आर्थिक रूप से पस्त कर देगा, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा! चीन ने अपनी रणनीति बदली और भारत के साथ मिलकर ऐसा व्यापारिक खेल खेला कि अमेरिका की नींद उड़ गई। चीन और भारत के बीच अरबों डॉलर के व्यापार का नया रिकॉर्ड कायम हो रहा है, जिसने अमेरिका की टैरिफ धमकियों को पूरी तरह से बेअसर कर दिया है।
ब्लूमबर्ग की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने चीन से भारत का आयात 12.5 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, और इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग व्यापार का मुख्य कारण कोई और नहीं, बल्कि एप्पल का आईफोन प्रोडक्शन है।
आईफोन की भारत में असेंबलिंग, चीन को कैसे फायदा?
आप सोच रहे होंगे कि आईफोन का प्रोडक्शन भारत में शिफ्ट होने से चीन को कैसे फायदा हो सकता है? इसका सीधा जवाब है – पुर्जे और चिप्स! भले ही आईफोन की असेंबलिंग भारत में हो रही हो, लेकिन इसके लिए आवश्यक चिप्स, पुर्जे और मशीनरी अभी भी बड़े पैमाने पर चीन से ही आ रही है।
आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं:
- जुलाई 2025 में ही, चीन ने भारत को 1 अरब डॉलर के कंप्यूटर चिप्स भेजे।
- इसके अलावा, अरबों डॉलर के फोन और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स भारतीय फैक्ट्रियों तक पहुंचे।
यानी, "मेड इन इंडिया" एप्पल की कहानी के पीछे "मेड इन चाइना" का तड़का साफ दिखाई दे रहा है। यह रिकॉर्ड-तोड़ व्यापार उस समय हो रहा है जब अमेरिका ने चीन और भारत पर कड़े टैरिफ लगा रखे हैं।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति हुई नाकाम!
ट्रंप प्रशासन का मानना था कि टैरिफ बढ़ाने से चीन और भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और अमेरिका जीत जाएगा। लेकिन, चीन ने अपनी चाल बदली। अमेरिका पर निर्भरता कम करते हुए, चीन ने भारत को एक नए और बड़े बाजार के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं, चीन ने अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी नए ग्राहक ढूंढ लिए हैं, और यूरोप में भी अपनी पैठ बढ़ा रहा है।
वैश्विक व्यापार में आया भूचाल!
जेपी मॉर्गन के मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री साजिद चिनॉय के अनुसार, वैश्विक व्यापार की गतिशीलता में आ रहे तीव्र बदलावों के कारण उभरते बाजारों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बढ़ते अमेरिकी टैरिफ, चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और तेज ऑटोमेशन का मिश्रण विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के विकास के मॉडल को पूरी तरह से बदल सकता है।
चिनॉय का मानना है कि जब अमेरिका तक पहुंच सीमित हो जाती है, तो चीनी निर्माता अपनी रणनीति बदलने से नहीं हिचकिचाते। वे कहते हैं, "उभरते बाजारों से शुरुआत करना अच्छा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर जो कुछ हो रहा है, उसका असली खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ेगा।"
यह स्थिति 1930 के दशक के बाद से सबसे ऊंचे टैरिफ स्तरों की ओर इशारा कर रही है, और प्रभावी अमेरिकी टैरिफ दर 17-18% तक बढ़ सकती है। अमेरिका के अलगाववादी टैरिफ के दांव ने अनजाने में ही सही, चीन और भारत के बीच एक नई आर्थिक साझेदारी को मजबूत कर दिया है, जिसने वैश्विक व्यापार के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
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