ईरान के 400 किलो यूरेनियम का रहस्य: नेतन्याहू और ट्रंप की उड़ी नींद!

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
where did iran 400 kg of uranium go this is causing tension for netanyahu trump

वाशिंगटन के गलियारों में इस वक्त एक ऐसी सैन्य योजना की सुगबुगाहट है, जो वैश्विक राजनीति के समीकरण बदल सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इस गंभीर विकल्प पर विचार कर रहे हैं कि क्या ईरान के परमाणु ठिकानों से लगभग 1,000 पाउंड (453.5 किलोग्राम) समृद्ध यूरेनियम को सीधे जब्त करने के लिए अमेरिकी सेना को मैदान में उतारा जाए। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि इस साहसी मिशन को हरी झंडी मिलती है, तो अमेरिकी कमांडो कई दिनों तक ईरानी सरजमीं पर तैनात रह सकते हैं, जो मौजूदा संघर्ष को एक अभूतपूर्व स्तर पर ले जाएगा। हालांकि, ट्रंप ने अभी अंतिम मुहर नहीं लगाई है, लेकिन ईरान को ‘परमाणु मुक्त’ रखने की अपनी जिद के कारण वे इस विकल्प के प्रति काफी गंभीर हैं।

इसे भी पढ़ें: एक तस्वीर के लिए तबाही! Iran में ‘Iwo Jima’ दोहराने की Trump की जिद दुनिया को डुबो देगी?

ट्रंप ने जहां एक ओर कूटनीति का दरवाजा खुला रखा है, वहीं दूसरी ओर अपने सलाहकारों को ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने का निर्देश दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि “ईरान परमाणु सामग्री को अपने पास नहीं रख सकता।” निजी चर्चाओं में उन्होंने संकेत दिया है कि अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो बल प्रयोग ही अंतिम रास्ता होगा। पत्रकारों को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि ईरान को अमेरिकी शर्तों को मानना ही होगा, अन्यथा “उनका कोई देश नहीं बचेगा।” यूरेनियम के खतरे पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे हमें सिर्फ परमाणु धूल ही देंगे।

परदे के पीछे कोशिशें, पर सीधा संवाद शून्य

हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए परदे के पीछे से सेतु बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक कोई सीधी मेज नहीं सजी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इस पूरी तैयारी को एक सामान्य रणनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमांडर-इन-चीफ को अधिकतम विकल्प उपलब्ध कराना पेंटागन की जिम्मेदारी है, और इसका मतलब यह कतई नहीं कि कोई निश्चित फैसला ले लिया गया है। फिलहाल, पेंटागन और अमेरिकी केंद्रीय कमान ने ऑपरेशन की बारीकियों पर चुप्पी साध रखी है।

इसे भी पढ़ें: सऊदी प्रिंस ने मेरे A** को Kiss किया, ट्रंप ने MBS को लेकर किया चौंकाने वाला दावा, फिर बताया बेहतरीन इंसान

कहां छिपा है ‘परमाणु खतरा’?

विशेषज्ञों और राफेल ग्रॉसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले हमलों के बावजूद ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता वाला 400 किलो और 20 प्रतिशत शुद्धता वाला लगभग 200 किलो यूरेनियम होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि यह खतरनाक जखीरा इस्फ़हान की रहस्यमयी भूमिगत सुरंगों और नतान्ज़ के परमाणु केंद्रों में सुरक्षित रखा गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास इतनी क्षमता है कि वह जरूरत पड़ने पर रातों-रात नए भूमिगत संवर्धन केंद्र तैयार कर सकता है, जो अमेरिकी सेना के लिए इस मिशन को और भी चुनौतीपूर्ण बना सकता है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version