मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: ईरान के मिसाइल हमलों से दहला कुवैत, अमेरिका का करारा पलटवार
कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का टी1 टर्मिनल इस वक्त धुएं और मलबे की गवाही दे रहा है। ईरान द्वारा किए गए भीषण ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद हवाई अड्डे पर विमानों की आवाजाही पूरी तरह ठप कर दी गई है। कुवैती अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में न केवल हवाई अड्डे की बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुँचा है, बल्कि कई लोग घायल भी हुए हैं। इस बीच, वाशिंगटन से आई रिपोर्टों ने तनाव को और बढ़ा दिया है; अमेरिका का दावा है कि ईरान ने कुवैत पर दो मिसाइलें दागीं जो लक्ष्य से चूक गईं, जबकि बहरीन की ओर भेजी गई तीन मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराया गया।
जवाबी कार्रवाई में देरी न करते हुए, अमेरिका ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर ‘आत्मरक्षा’ में हमले किए। इसके तुरंत बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इस बीच, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने ‘एमएससी सरिस्का’ नामक एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल दागकर समुद्र में भी युद्ध छेड़ दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने पहले ओमान सागर में उनके एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया था, यह कार्रवाई उसी का प्रतिशोध है।
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होर्मुज की घेराबंदी और मार्को रुबियो की चेतावनी
वाशिंगटन में एक संसदीय सुनवाई के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का पुरजोर बचाव किया। रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर की जा रही गोलीबारी ही इस सख्त कदम की मुख्य वजह है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर किसी के जहाज बाहर नहीं निकल पाएंगे, तो ईरान के जहाज भी समुद्र की लहरों पर नहीं दिखेंगे।” रुबियो ने यह भी दावा किया कि लगातार संघर्षों के कारण ईरानी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है और देश की अर्थव्यवस्था अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है।
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समुद्र में ‘प्रतिशोध’ की आग: मालवाहक पोत पर हमला
कुवैत और बहरीन में मचे हड़कंप से कुछ ही घंटे पहले, इराक के बंदरगाह से रवाना हुए एक पनामा ध्वज वाले पोत ‘एमएससी सारिस्का वी’ पर दो मिसाइलें दागी गईं। रॉयटर्स और प्रेस टीवी की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे ‘अमेरिकी-ज़ायोनी’ दुश्मन पर किया गया प्रहार बताया। IRGC ने चेतावनी दी है कि बहरीन और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े की मौजूदगी उनके निशाने पर है। गार्ड्स के बयान में साफ तौर पर कहा गया है—”हमने पहले ही आगाह किया था कि किसी भी आक्रामकता का जवाब पहले से कहीं अधिक कड़ा और विनाशकारी होगा, और हमने वही करके दिखाया है।”
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