पश्चिम एशिया के अशांत हालातों के बीच, भारतीय तिरंगा थामे दो विशाल एलपीजी वाहक जहाज—’जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’—दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को पार करने की चुनौतीपूर्ण तैयारी में हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, फारस की खाड़ी से गैस लेकर भारत की ओर बढ़ रहे ये दोनों जहाज फिलहाल लारक-केशम चैनल की ओर अग्रसर हैं। इस बाधा को पार करते ही ये जहाज भारतीय बंदरगाहों के लिए अपना सफर पूरा करेंगे। गौरतलब है कि 28 फरवरी को संघर्ष छिड़ने के बाद से इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी, जिससे ईरान और ओमान के बीच सैकड़ों जहाज फंस गए थे। हालांकि, भारत के सधे हुए कूटनीतिक प्रयासों के चलते पिछले सप्ताह ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नामक दो भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से गुजरात पहुंचने में सफल रहे थे।
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ऊर्जा सुरक्षा की ढाल बना भारत, बढ़ाया वैश्विक सहयोग
बढ़ती चिंताओं के बीच 20 मार्च को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है। व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर बढ़ते दबाव को देखते हुए, सरकार ने संकट से जूझ रहे निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज का ऐलान किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्थिति की गंभीरता पर कहा, “यह न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए परीक्षा की घड़ी है। हमारे शीर्ष नेता निरंतर अपने वैश्विक समकक्षों के साथ संवाद कर रहे हैं।” इस संकटपूर्ण समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी कुवैत जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ कूटनीतिक मोर्चे पर मोर्चा संभाले हुए हैं।
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होर्मुज की घेराबंदी पर भड़का विश्व, ईरान की कड़ी निंदा
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को “वास्तविक रूप से बंद” किए जाने के कदम ने दुनिया भर में आक्रोश पैदा कर दिया है। 20 से अधिक देशों ने एक सुर में इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया सहित कई यूरोपीय देशों ने एक साझा बयान जारी कर वाणिज्यिक जहाजों और तेल-गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरानी हमलों की निंदा की है। इस वैश्विक गठबंधन ने दो टूक शब्दों में कहा, “हम खाड़ी में निहत्थे व्यापारिक जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कड़ी निंदा करते हैं। ईरानी सेना द्वारा इस महत्वपूर्ण मार्ग को अवरुद्ध करना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का सीधा उल्लंघन है।”
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