आसमान में हड़कंप: शटडाउन की मार, 4000 से अधिक उड़ानों पर लगी ब्रेक!
नई दिल्ली: अमेरिका में पिछले 27 दिनों से जारी सरकारी शटडाउन का असर अब आम आदमी की यात्रा पर भी दिखने लगा है। सोमवार को देश भर में 4,000 से अधिक उड़ानें अपनी मंज़िल तक देर से पहुंचीं, जबकि लगभग 118 उड़ानें पूरी तरह से रद्द कर दी गईं। यह भयावह स्थिति हवाई अड्डों और हवाई यातायात नियंत्रण टावरों में कर्मचारियों की भारी कमी का परिणाम है, जिसने हवाई यात्रा को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
फ्लाइटअवेयर के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। रविवार को ही 8,700 से ज्यादा उड़ानें देरी की मार झेल चुकी हैं, और यह सिलसिला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कल्पना कीजिए, करीब 13,000 हवाई यातायात नियंत्रक और 50,000 परिवहन सुरक्षा अधिकारी बिना वेतन के काम कर रहे हैं – यह कैसा दबाव होगा!
संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ने स्पष्ट किया है कि स्टाफ की कमी के चलते दक्षिण-पूर्वी इलाकों और न्यू जर्सी के प्रतिष्ठित नेवार्क लिबर्टी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। लॉस एंजिल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तो एफएए को जमीनी विलंब (ground delay) लागू करना पड़ा, जिससे उड़ानों को औसतन 25 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।
परिवहन विभाग के सचिव, सीन डफी, ने फॉक्स न्यूज को रविवार को बताया, “कर्मचारियों को गुरुवार और शुक्रवार को ही सूचना मिल गई थी कि मंगलवार को मिलने वाला उनका वेतन नहीं मिलेगा।” डफी ने हवाई यातायात नियंत्रकों के सामने आ रहे भावनात्मक और वित्तीय तनाव को उजागर किया। “मैंने उनसे बात की है, और उनके चेहरों पर चिंता साफ झलकती है। ये वो लोग हैं जो हर महीने की तनख्वाह पर निर्भर करते हैं। उन्हें कार में पेट्रोल भरवाने और बच्चों की देखभाल की चिंता सता रही है,” उन्होंने कहा।
हालांकि, परिवहन विभाग ने यह भी आश्वासन दिया है कि उड़ानें जारी रहेंगी, लेकिन यह चेतावनी भी दी है कि यदि शटडाउन लंबा चला, तो देरी और रद्द होने की संभावना और बढ़ जाएगी। एयरलाइनों ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे अपनी उड़ानों की नवीनतम स्थिति की जांच अवश्य करें और हवाई अड्डे पर संभावित लंबे इंतजार के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें।
विशेषज्ञों का मानना है कि शटडाउन खत्म होने के बाद भी, उड़ानों में हुई देरी के इस बड़े बैकलॉग को निपटाने में काफी समय लगेगा। कर्मचारियों की कमी और संचालन संबंधी अव्यवस्थाएं इस प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेंगी। देश भर के हवाई अड्डों पर लगातार व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है, और संघीय गतिरोध का कोई त्वरित समाधान फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
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