ट्रंप की ‘महा-स्ट्राइक’ की चेतावनी: क्या अब खुलेगा होर्मुज का रणनीतिक रास्ता?

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ट्रंप की 'महा-स्ट्राइक' की चेतावनी: क्या अब खुलेगा होर्मुज का रणनीतिक रास्ता?
hormuz strait likely to open soon donald trump warns of a major strike

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप का बड़ा दांव: ‘समझौता हुआ तो ठीक, वरना ईरान को लगेगा अब तक का सबसे बड़ा झटका’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेवर कड़े करते हुए साफ कर दिया है कि ईरान और ओमान के साथ एक रणनीतिक समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को “बहुत जल्द” खोल दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने एक सख्त चेतावनी भी जोड़ दी—अगर इलाके में तनाव घटाने के लिए चल रही बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती, तो ईरान को “बहुत बड़ा झटका” झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित शैली में दोहराया कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे और इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का भविष्य अब कूटनीतिक मेज पर होने वाले फैसलों से जुड़ा है।

फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दोटूक कहा, “ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे। फिलहाल उनके पास ये नहीं हैं, और हम इसे औपचारिक रूप देंगे। जलडमरूमध्य बहुत जल्द खुल जाएगा, वर्ना उन्हें ऐसी चोट पहुंचेगी जो उन्होंने सोची नहीं होगी।” उनके इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब खबरें हैं कि अमेरिका, ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक ‘अंतरिम समझौते’ को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ‘एक्सियोस’ (Axios) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने वाशिंगटन और तेहरान के बीच 14-सूत्रीय सहमति पत्र (MoU) के विफल होने के बाद से क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे थे। अब इस नई व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीज़फायर बहाल करना और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अटकी हुई बातचीत को फिर से पटरी पर लाना है।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा करते हुए ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक विध्वंसक सैन्य कार्रवाई की दहलीज पर था। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ से कहा, “हम एक ऐसे प्रचंड हमले की तैयारी कर चुके थे, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला होता। लेकिन तभी उनकी तरफ से फोन आया और उन्होंने बेहद विनम्रता से गुजारिश की— ‘क्या हम बात कर सकते हैं?’ वे तबाही नहीं चाहते थे और मैंने भी कहा कि ठीक है, चलिए बात करते हैं। आखिरकार, कूटनीति को एक मौका मिलना ही चाहिए।”


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