जिनपिंग का बुलावा, ट्रंप की चीन यात्रा पर संशय: बीजिंग के साथ तनातनी के बीच ट्रंप ने किया खुलासा

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Xi ने मुझे बुलाया है...जापान से चीन संग तनाव के बीच ट्रंप ने बताया कब करेंगे बीजिंग का दौरा

ट्रंप की चीन यात्रा की घोषणा: शी जिनपिंग संग फोन पर हुई ‘शानदार’ बातचीत, व्यापार से यूक्रेन तक पर हुई चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वह अप्रैल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर चीन की यात्रा करेंगे। यह जानकारी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि उनकी शी जिनपिंग के साथ फोन पर बेहद सकारात्मक बातचीत हुई, जिसमें यूक्रेन, रूस, फेंटेनाइल, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

ट्रंप ने इस बातचीत को अपने ‘ग्रेट फार्मर्स’ के लिए एक “अच्छा और बहुत महत्वपूर्ण समझौता” बताया, और कहा कि यह भविष्य में और भी बेहतर होता जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह बातचीत 30 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया में हुई उनकी “बेहद सफल” बैठक के बाद हुई है, और दोनों देशों ने हालिया समझौतों को वर्तमान और सटीक बनाए रखने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

बीजिंग की प्रतिक्रिया और ‘ताइवान’ का मुद्दा

वहीं, बीजिंग ने ट्रंप और शी के बीच फोन पर हुई बातचीत की पुष्टि की, लेकिन राजकीय यात्राओं के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, ताइवान और यूक्रेन के मुद्दों पर चर्चा की।

खास बात यह है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि ताइवान की चीन में वापसी ‘युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक अभिन्न अंग’ है और यह बीजिंग के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह वह बिंदु था जिसका ट्रंप ने अपने पोस्ट में उल्लेख नहीं किया था। दोनों पक्षों द्वारा बातचीत के कुछ अंशों का उल्लेख न करना इस बात का संकेत देता है कि दोनों महाशक्तियों के बीच अभी भी कुछ अनसुलझे मुद्दे मौजूद हैं, बावजूद इसके कि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बने व्यापार युद्ध को कम करने के लिए साझा आधार तैयार करने पर जोर दे रहे हैं।

चीन-जापान संबंधों में तनाव और ताइवान का सामरिक महत्व

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की हालिया टिप्पणियों के बाद चीन-जापान संबंध तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ताकाइची ने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है, तो जापान की सेना भी इसमें शामिल हो सकती है। जापान, अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है। ताइवान, एक स्वशासित द्वीप है, जिसे चीन अपना हिस्सा मानता है।


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