आतंक पर प्रहार, नया भारत अडिग: ऑपरेशन सिंदूर से विश्व को संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए, एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व आज गवाह है कि नया भारत आतंकवाद से न तो भयभीत होता है, और न ही उसके सामने झुकता है। यह राष्ट्र शांति का पक्षधर है, परंतु अपनी सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
श्री मोदी ने गुरु तेग बहादुर के शौर्य और बलिदान को नमन करते हुए कहा, “हम विश्व बंधुत्व की भावना से प्रेरित हैं, साथ ही अपनी सीमाओं की रक्षा के प्रति भी सजग हैं। शांति हमारी प्राथमिकता है, लेकिन सुरक्षा हमारी अटूट प्रतिबद्धता।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि यह कार्रवाई इस सिद्धांत का सबसे ज्वलंत प्रमाण है। “नया भारत न डरता है, न रुकता है, और न ही आतंकवाद के सामने घुटने टेकता है। आज का भारत पूर्ण सामर्थ्य, अदम्य साहस और स्पष्टता के साथ प्रगति के पथ पर अग्रसर है।”
नशे के खिलाफ गुरु की शिक्षाएं: युवाओं के लिए प्रेरणा
प्रधानमंत्री ने युवाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे, नशे की समस्या पर भी प्रकाश डाला, जिसे गुरु साहिब ने भी गंभीरता से लिया था। उन्होंने कहा, “नशे की लत ने हमारे अनेक युवाओं के सपनों को कुचल दिया है। सरकार इस समस्या के उन्मूलन के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, परंतु यह समाज और परिवारों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे कठिन समय में, गुरु तेग बहादुर की शिक्षाएं हमारे लिए न केवल प्रेरणा स्रोत हैं, बल्कि समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।”
अयोध्या से कुरुक्षेत्र: विरासत का संगम
प्रधानमंत्री ने दिन में अपनी अयोध्या यात्रा का भी स्मरण किया और उसे भारत की समृद्ध विरासत का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने कहा, “आज सुबह मैं रामायण की पवित्र नगरी अयोध्या में था, और अब मैं गीता की पावन भूमि कुरुक्षेत्र में उपस्थित हूँ। हम सभी यहाँ श्री गुरु तेग बहादुर जी को उनके 350वें शहीदी दिवस पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। मैं इस कार्यक्रम में पधारे सभी संत-महात्माओं और आदरणीय संगत को सादर नमन करता हूँ।”
ऑपरेशन सिंदूर: एक निर्णायक सैन्य प्रतिक्रिया
भारत ने मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था। यह पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की सीधी सैन्य प्रतिक्रिया थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। 7 मई की भोर में शुरू किए गए इस अभियान में, भारत ने 10 मई को युद्धविराम की घोषणा से पहले, पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकवादी ठिकानों और सैन्य चौकियों को निशाना बनाया था। इस भीषण संघर्ष में लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, सशस्त्र ड्रोनों और तोपखाने का व्यापक इस्तेमाल किया गया था।
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