रणभूमि में किम की ‘राजकुमारी’: क्या टैंक पर सवार होकर लिखा जा रहा है विश्व युद्ध का नया अध्याय?
जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा सुलगते संघर्षों की आग में झुलस रहा है, क्या तब उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन एक और मोर्चा खोलने की फिराक में हैं? हालिया घटनाक्रम और प्योंगयांग से आई तस्वीरें किसी सामान्य युद्धाभ्यास की नहीं, बल्कि एक गहरे वैश्विक संकट की आहट दे रही हैं। सत्ता के दांव-पेंच, सैन्य आधुनिकीकरण और उत्तराधिकार की नई पटकथा अब टैंकों की गड़गड़ाहट के बीच लिखी जा रही है, और इसके पीछे छिपे संकेत बेहद गंभीर हैं।
पूरी दुनिया उस समय चौंक गई जब किम जोंग उन अपनी किशोर बेटी किम जु ए के साथ एक विशाल टैंक पर सवार नजर आए। चमचमाते काले चमड़े के जैकेट पहने पिता-पुत्री की यह जोड़ी केवल युद्धाभ्यास का निरीक्षण नहीं कर रही थी, बल्कि एक शक्तिशाली राजनीतिक और रणनीतिक संदेश दे रही थी। टैंक के ऊपर बैठा यह परिवार दुनिया को यह बताने की कोशिश कर रहा है कि प्योंगयांग युद्ध के लिए न केवल सैन्य रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी पूरी तरह तैयार है।
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दिलचस्प बात यह है कि किम अपनी बेटी को केवल पारिवारिक स्नेह के कारण साथ नहीं ला रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में किम जु ए जिस तरह मिसाइल परीक्षणों, सधे हुए गोलीबारी अभ्यासों और हथियार फैक्ट्रियों के दौरों में सक्रिय दिखी हैं, वह चौंकाने वाला है। राइफल और पिस्तौल थामे किम जु ए की तस्वीरें इस बात की तस्दीक करती हैं कि उन्हें केवल दिखाने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की कमान संभालने के लिए कठोर सैन्य सांचे में ढाला जा रहा है।
इस पूरे परिदृश्य को यदि वैश्विक राजनीति के चश्मे से देखें, तो खतरा और बड़ा नजर आता है। हाल ही में जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास में व्यस्त थे, तब उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्योंगयांग की यह ‘मिसाइल कूटनीति’ सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी थी कि उनके किसी भी कदम का जवाब आग और बारूद से दिया जाएगा।
एक तरफ जहां पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, वहीं किम जोंग उन इस अस्थिरता को एक सुनहरे अवसर के रूप में देख रहे हैं। रणनीतिक रूप से किम दोहरी चाल चल रहे हैं। पहली—अपनी सैन्य शक्ति को अत्याधुनिक बनाना, जिसमें नए जमाने के टैंक और ड्रोन रोधी प्रणालियां शामिल हैं। दूसरी—सत्ता के उत्तराधिकार को सुरक्षित करना। किम जु ए को दुनिया के सामने पेश कर वह यह स्पष्ट कर रहे हैं कि उनकी सत्ता की विरासत महफूज है।
हालांकि, प्योंगयांग के गलियारों में सबकुछ इतना सीधा भी नहीं है। किम जोंग उन की बहन और देश की दूसरी सबसे प्रभावशाली हस्ती किम यो जोंग, उत्तराधिकार की इस राह में एक अदृश्य चुनौती की तरह मौजूद हैं। राजनीतिक अनुभव और सैन्य समर्थन के मामले में वह एक मजबूत दावेदार हैं, जो भविष्य में किम परिवार के भीतर एक बड़े सत्ता संघर्ष का सबब बन सकता है।
इसी बीच, उत्तर कोरिया के हालिया संसदीय चुनावों ने एक बार फिर दुनिया को हैरत में डाल दिया। वहां किम की पार्टी को लगभग शत-प्रतिशत वोट मिले, जहां विपक्ष का नामो-निशान तक नहीं था। लेकिन गौर करने वाली बात यह रही कि दशकों बाद पहली बार 0.07 प्रतिशत ‘ना’ के वोटों को सार्वजनिक किया गया। यह डेटा भले ही मामूली हो, लेकिन यह किम शासन द्वारा दिखाई गई एक ‘नियंत्रित पारदर्शिता’ का हिस्सा है, जो दुनिया को अपनी अटूट पकड़ दिखाने का एक नया तरीका है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध है? शायद नहीं। जब एक तानाशाह अपनी बेटी को टैंक चलाना सिखा रहा हो और सीमाएं मिसाइलों की गूंज से थर्रा रही हों, तो इसे महज ‘दिखावा’ कहना एक बड़ी भूल होगी। यह एक सुनियोजित तैयारी है, जो टैंक की गर्जना और हथियारों की नुमाइश के जरिए वैश्विक संतुलन को चुनौती देने का दम रखती है।
दुनिया को अब यह हकीकत स्वीकारनी होगी कि उत्तर कोरिया कोई हाशिए पर पड़ा देश नहीं, बल्कि एक ऐसा खिलाड़ी है जो सही मौके की तलाश में है। जब यह सन्नाटा टूटेगा, तो इसकी गूंज केवल कोरियाई प्रायद्वीप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह पूरे विश्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख सकती है।
-नीरज कुमार दुबे
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