पाकिस्तान का ‘टैक्स टेरर’: घुट रहा कारोबारियों का दम, उद्योग जगत ने दी तबाही की आखिरी चेतावनी!

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Pakistan के Tax System से तबाह हो रहे कारोबार, उद्योग जगत ने दी बड़ी चेतावनी

पाकिस्तान के FMCG सेक्टर पर ‘टैक्स का प्रहार’: उद्योग जगत ने जताई गहरी चिंता

पाकिस्तान का फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) और खाद्य उद्योग इस समय संघीय राजस्व बोर्ड (FBR) की सख्त कर नीतियों और अग्रिम कर के भारी बोझ तले कराह रहा है। हैदराबाद SITE एसोसिएशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष जुबैर घंग्रा ने चेतावनी दी है कि मौजूदा कराधान ढांचा न केवल औद्योगिक विकास की राह में रोड़ा बन गया है, बल्कि व्यावसायिक स्थिरता के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश कर रहा है।

‘डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, घंग्रा ने इस बात पर जोर दिया कि जटिल कर वसूली तंत्र ने पूरी सप्लाई चेन में परिचालन संबंधी बाधाएं खड़ी कर दी हैं। इससे न केवल व्यावसायिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं, बल्कि संगठित व्यवसायों पर बोझ भी असहनीय हो गया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जहाँ खुदरा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा अब भी कर प्रणाली (डॉक्यूमेंटेड इकोनॉमी) से बाहर है, वहीं सारा दबाव पंजीकृत निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और वितरकों पर डाला जा रहा है। घंग्रा के मुताबिक, हजारों अपंजीकृत खुदरा विक्रेताओं की मौजूदगी ने ईमानदारी से कर चुकाने वाले व्यवसायों को नुकसान में डाल दिया है।

इस असंतुलन ने औपचारिक क्षेत्र के परिचालन खर्चों को अत्यधिक बढ़ा दिया है, जबकि अपंजीकृत व्यापारियों को बिना किसी जवाबदेही के काम करने की छूट मिली हुई है।

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पंजीकृत कंपनियां, जो पहले से ही बेकाबू मुद्रास्फीति और घटती उपभोक्ता मांग का सामना कर रही हैं, इस समय भारी वित्तीय दबाव में हैं। उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि अत्यधिक कागजी कार्रवाई और अनुपालन की जटिलताओं ने एफएमसीजी और खाद्य कंपनियों की कमर तोड़ दी है। इस व्यवस्था ने नकदी प्रवाह (Cash Flow) को बाधित किया है और कम मुनाफे पर काम करने वाले व्यवसायों के लिए अनावश्यक प्रशासनिक मुसीबतें पैदा कर दी हैं।

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ये अतिरिक्त लागतें अंततः आम उपभोक्ताओं पर बोझ बनकर गिरती हैं, जिससे कीमतें बढ़ती हैं और आर्थिक अस्थिरता गहराती है। घंग्रा ने कराधान मॉडल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह प्रणाली औपचारिक व्यापारिक तौर-तरीकों को हतोत्साहित करती है और परोक्ष रूप से अवैध अर्थव्यवस्था को फलने-फूलने का मौका देती है। उनके अनुसार, पंजीकृत कंपनियां निरंतर नियामक दबाव झेल रही हैं, जबकि अपंजीकृत बाजार के खिलाड़ी कर के दायरे से पूरी तरह अछूते हैं।

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जुबैर घंग्रा ने चेतावनी दी कि जब तक इस संरचनात्मक असंतुलन को ठीक नहीं किया जाता, तब तक एक न्यायपूर्ण और कुशल कराधान प्रणाली का सपना अधूरा रहेगा। ‘डॉन’ के अनुसार, उन्होंने नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे मौजूदा कर ढांचे में सुधार करें और पंजीकृत क्षेत्रों को और अधिक निचोड़ने के बजाय कर के दायरे (Tax Base) को व्यापक बनाने पर ध्यान केंद्रित करें।


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