शेयर बाजार में ‘सुनामी’ के बीच यूपी का जलवा, उत्तर भारत बना नया इन्वेस्टमेंट हब; साउथ-वेस्ट में दिखी सुस्ती
जियोपॉलिटिकल तनाव के साये में शेयर बाजार की हलचल ने नए निवेशकों की रफ्तार पर कुछ हद तक ब्रेक लगा दिया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट में उतार-चढ़ाव के चलते नए निवेशकों के रजिस्ट्रेशन में महीने-दर-महीने 2.5% की गिरावट दर्ज की गई है। मई 2026 में यह संख्या सिमटकर 10.5 लाख रह गई। दिलचस्प बात यह है कि निवेशकों के जुड़ने की इस सुस्ती में दक्षिण और पश्चिम भारत सबसे आगे रहे, जबकि उत्तर भारत का दबदबा कायम रहा।
रिपोर्ट इशारा करती है कि हालांकि रजिस्ट्रेशन में कमी आई है, लेकिन राहत की बात यह है कि पिछले 12 महीनों के मुकाबले गिरावट की यह रफ्तार सबसे धीमी थी। आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में नए निवेशकों की संख्या मई 2025 की तुलना में 8.2% कम रही। क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो दक्षिण भारत में सबसे तगड़ी गिरावट दर्ज की गई, जहाँ निवेशकों के जुड़ने की संख्या 16.6% कम हुई, वहीं पश्चिम भारत में यह आंकड़ा 8.7% लुढ़क गया।
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इस सुस्ती के बावजूद, उत्तर भारत ने खुद को शेयर बाजार के नए ‘पावरहाउस’ के रूप में स्थापित किया है। मई 2026 में कुल नए निवेशकों में इस क्षेत्र का योगदान 42.2 प्रतिशत रहा। इसके बाद दक्षिण भारत (22.3%), पश्चिम भारत (21.2%) और पूर्व भारत (14%) का स्थान रहा। रिपोर्ट में एक बड़े भौगोलिक बदलाव का भी जिक्र है—FY22 से FY27TD के बीच उत्तर भारत की हिस्सेदारी में 5 प्रतिशत की बढ़त हुई है, जिसका श्रेय मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश को जाता है, जिसकी हिस्सेदारी इस दौरान 4.8 प्रतिशत बढ़ी।
इसके ठीक उलट, कभी निवेशकों का गढ़ रहे पश्चिम भारत की हिस्सेदारी में इसी अवधि में लगभग 10 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इस गिरावट का सबसे बड़ा केंद्र महाराष्ट्र रहा, जहाँ नए निवेशक रजिस्ट्रेशन में उसकी हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत तक कम हो गई।
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राज्यों की इस रेस में उत्तर प्रदेश मई 2026 में ‘सुपरस्टार’ बनकर उभरा। कुल नए निवेशकों में 16.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ अकेले यूपी से करीब 1.7 लाख नए लोग जुड़े। इसके बाद महाराष्ट्र 11 प्रतिशत हिस्सेदारी (1.1 लाख रजिस्ट्रेशन) के साथ दूसरे पायदान पर रहा। पश्चिम बंगाल (6.7%), बिहार (6.6%) और तमिलनाडु (6%) ने भी शीर्ष पाँच में अपनी जगह बनाई। कुल मिलाकर, मई के महीने में नए निवेशकों की फौज खड़ी करने में इन टॉप 5 राज्यों का योगदान 46.4 प्रतिशत रहा।
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