तनाव के बढ़ते बादलों के बीच, उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के आगामी सैन्य अभ्यास को ‘युद्ध के पूर्वाभ्यास’ करार देते हुए शुक्रवार को कड़ी निंदा की है। उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी है कि वह अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। गौरतलब है कि सोमवार से दोनों देश अपना वार्षिक व्यापक सैन्य अभ्यास शुरू करने जा रहे हैं, जिसे इस साल भी पिछले वर्षों की तरह ही बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा।
दोनों सहयोगी देशों ने स्पष्ट किया है कि ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास का एकमात्र उद्देश्य उत्तर कोरिया से मिलने वाले खतरों से निपटने की अपनी तैयारियों को पुख्ता करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पूरी तरह से एक रक्षात्मक अभ्यास है। हालांकि, उत्तर कोरिया की इस तीखी प्रतिक्रिया से यह संकेत मिल रहे हैं कि वह आने वाले दिनों में हथियारों के नए परीक्षण कर सकता है।
दरअसल, पिछले सप्ताह पड़ोसी देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से दो बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण की पुष्टि की थी। हालांकि उत्तर कोरिया ने इन मिसाइल परीक्षणों पर चुप्पी साधी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इनका मकसद अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास का विरोध करना या अपनी हथियार प्रणालियों को अपग्रेड करना हो सकता है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने सरकारी मीडिया के जरिए एक कड़ा बयान जारी करते हुए इस अभ्यास को “आक्रामक युद्ध का ऐसा पूर्वाभ्यास” बताया, जो “क्षेत्र में अस्थिरता का नया स्तर पैदा कर रहा है।”
बयान में आगे कहा गया, “किसी नए स्तर के खतरे का जवाब, नए स्तर की प्रतिरोधक क्षमता से देकर सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा अटूट सिद्धांत है।” उत्तर कोरिया ने दो टूक कहा कि वह “किसी भी खतरे और चुनौती से निपटने के लिए अपने वैध आत्मरक्षा के अधिकार का जिम्मेदारी और दृढ़ता से इस्तेमाल करेगा, जिससे दुश्मनों के प्रति उसका रुख और अधिक स्पष्ट हो जाएगा।” उत्तर कोरिया का यह भी दावा है कि यह अभ्यास “पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक उकसावे वाला और खतरनाक” साबित होगा।
दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया और अमेरिका की ओर से इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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