भारत का समर्थन: फलस्तीनी राष्ट्रपति को UN में मिली आवाज़, अमेरिका के इनकार के बावजूद
संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मतदान हुआ, जिसमें भारत ने फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए आगामी उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित करने की अनुमति देने वाले प्रस्ताव का पुरज़ोर समर्थन किया। यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिका ने फलस्तीनी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से भाग लेने के लिए वीज़ा देने से इनकार कर दिया था।
‘फलस्तीन राष्ट्र की भागीदारी’ प्रस्ताव पर भारी समर्थन
संयुक्त राष्ट्र की 193 सदस्यीय महासभा ने अपने 80वें सत्र में ‘फलस्तीन राष्ट्र की भागीदारी’ शीर्षक से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे 145 देशों का भारी समर्थन मिला। वहीं, मात्र पांच देशों ने इसके विरोध में वोट दिया, जबकि छह देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी।
भारत, अमेरिका और इज़राइल के रुख़
जहां अमेरिका और इज़राइल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, वहीं भारत उन देशों में शामिल था जिसने इसका सक्रिय रूप से समर्थन किया।
वीज़ा विवाद और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया
इस प्रस्ताव में अमेरिका द्वारा फलस्तीनी प्रतिनिधियों को वीज़ा देने से इनकार करने और उनके वीज़ा रद्द करने के फैसले पर गहरा खेद व्यक्त किया गया। यह निर्णय प्रभावी रूप से फलस्तीनी अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र की महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेने से रोक रहा था।
आगामी सत्र की रूपरेखा
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की आम बहस 23 सितंबर से शुरू होगी। इस दौरान, फलस्तीनी राष्ट्राध्यक्ष महमूद अब्बास 25 सितंबर को दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करेंगे, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए संभव होगा।
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