बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके परिवार पर बढ़ा कानूनी शिकंजा: भ्रष्टाचार और मानवता के खिलाफ अपराधों के गंभीर आरोप
ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाली घटनाओं की एक श्रृंखला में, देश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की नेता शेख हसीना को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया है। सोमवार को ढाका की एक अदालत ने उन्हें भूखंड धोखाधड़ी के एक मामले में पांच साल की जेल की सजा सुनाई। यह फैसला हाल के दिनों में हसीना और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ सुनाए गए कई फैसलों में से एक है, जिसने देश की राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया है।
परिवार के सदस्यों को भी मिली सजा:
इस मामले में सिर्फ शेख हसीना ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य भी कानूनी कार्रवाई की चपेट में आए हैं। उनकी छोटी बहन, शेख रेहाना, को भी इसी मामले में सात साल कैद की सजा सुनाई गई है। वहीं, रेहाना की बेटी और ब्रिटिश सांसद, ट्यूलिप सिद्दीकी, को दो साल की जेल की सजा मिली है।
भूखंड आवंटन में अनियमितता:
बांग्लादेश के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) ने पिछले जनवरी में शेख हसीना और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ ढाका के पुर्बाचल इलाके में कथित तौर पर सरकारी भूखंडों के अवैध आवंटन से संबंधित छह अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। इन्हीं में से एक मामले में सोमवार को हसीना को सजा सुनाई गई।
इससे पहले भी सुनाई गई कड़ी सजा:
यह पहला मामला नहीं है जब हसीना को भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी ठहराया गया हो। गुरुवार को ही ढाका की एक अदालत ने उन्हें तीन भूखंड धोखाधड़ी के मामलों में कुल 21 साल कैद की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश मोहम्मद अब्दुल्ला अल मामून ने प्रत्येक मामले में सात-सात साल की सजा सुनाई, जिससे कुल सजा 21 साल हो गई।
बेटे और बेटी पर भी आरोप:
शेख हसीना के बेटे, सजीब वाजेद जॉय, को भी पांच साल की जेल और एक लाख टका के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। उनकी बेटी, साइमा वाजेद पुतुल, को भी पांच साल की जेल की सजा मिली है।
मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप और मौत की सजा:
मामलों की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने शेख हसीना को जुलाई 2024 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के उनके प्रयासों के लिए मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी पाते हुए पहले ही मौत की सजा सुनाई है।
वकीलों की अनुपस्थिति और हसीना का इनकार:
हालांकि, इन सभी मामलों में शेख हसीना और उनके परिवार के पास कोई वकील नहीं था, क्योंकि वे फरार चल रहे हैं। इसके बावजूद, हसीना ने विभिन्न भाषणों और बयानों में किसी भी भ्रष्टाचार के आरोपों में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
भारत से प्रत्यर्पण का अनुरोध:
इस बीच, एक नई घटनाक्रम में, भारत सरकार बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के उस अनुरोध की जाँच कर रही है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की गई है। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद यह अनुरोध आया है।
विदेश मंत्रालय का बयान:
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा कि नई दिल्ली को इस मामले पर ढाका से औपचारिक रूप से पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत अपनी “चल रही न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं” के तहत बांग्लादेश की स्थिरता और उसके लोगों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।
यह घटनाक्रम बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, और आने वाले समय में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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