अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले और उसके जवाब में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 15% ग्लोबल टैरिफ लगाने के ऐलान ने वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। इस नए ट्रेड ऑर्डर के बीच भारत और चीन बड़े ‘विजेता’ बनकर उभरे हैं, जबकि यूनाइटेड किंगडम (UK) को सबसे गहरा जख्म मिलता दिख रहा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को तब बड़ा झटका दिया जब उसने ग्लोबल ट्रेड वॉर के दौरान लगाए गए कई टैरिफ को ‘अवैध’ करार देते हुए रद्द कर दिया। इस अदालती आदेश के चंद घंटों बाद ट्रंप ने पलटवार करते हुए मंगलवार से हर देश के इंपोर्ट पर 10% ड्यूटी लगाने की घोषणा की, जिसे शनिवार को बढ़ाकर 15% कर दिया गया।
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भारत और चीन की चांदी
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप द्वारा ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ का इस्तेमाल गैर-कानूनी था। इस फैसले से चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर पहले की तुलना में कम टैरिफ देना होगा।
भारत का पक्ष:
भारतीय सामानों पर टैरिफ का ग्राफ काफी नाटकीय रहा है। पहले यह 50% तक पहुंचा, फिर फरवरी में घटकर 25% हुआ। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई ट्रेड डील में इसे 18% करने का वादा किया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह गिरकर 10% पर आ गया और अब शनिवार के नए आदेश के बाद 15% पर स्थिर है। भारत के लिए यह 15% का रेट, द्विपक्षीय समझौते (18%) और लिबरेशन डे (26%) के स्तर से कहीं ज्यादा बेहतर और किफायती है।
चीन की स्थिति:
बीजिंग इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10% ‘फेंटानिल टैरिफ’ हटाए जाने के बाद चीन के एक्सपोर्ट पर अब कम सख्त रेट लागू होंगे। चीन ने अमेरिका से एकतरफा टैरिफ खत्म करने की अपील करते हुए कहा है कि ‘प्रोटेक्शनिज़्म’ (संरक्षणवाद) से किसी का भला नहीं होता। चीन की ही तरह मेक्सिको को भी फेंटानिल से जुड़े चार्ज हटने का सीधा फायदा मिला है।
सबसे बड़ा झटका यूके को:
ट्रंप के इस नए फैसले ने ब्रिटेन की चिंताएं सबसे ज्यादा बढ़ा दी हैं। अब तक यूके को 10% के कम ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ का लाभ मिल रहा था, लेकिन अब ट्रंप द्वारा सभी देशों के लिए फ्लैट 15% टैरिफ लागू करने से ब्रिटिश कंपनियों पर ड्यूटी का बोझ बढ़ गया है। ‘ग्लोबल ट्रेड अलर्ट’ के मुताबिक, इस बदलाव से यूके को सबसे तगड़ा नुकसान होगा, जिसके बाद इटली और सिंगापुर का नंबर आता है। इसके विपरीत, टैरिफ की इस नई व्यवस्था में भारत, चीन और ब्राजील सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं।
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