ट्रंप का ‘हंटर’: पाकिस्तान की हेकड़ी निकाल अमेरिका ने पेशावर से समेटा बोरिया-बिस्तर, भारत के साथ शुरू हुआ दोस्ती का नया सुनहरा दौर
अमेरिका की गोद में बैठकर भारत को आंखें दिखाने वाले पाकिस्तान को डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा जोरदार झटका दिया है कि पूरी दुनिया दंग रह गई है। बर्बादी की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए यह किसी बड़े सदमे से कम नहीं है, जिसने 25 करोड़ पाकिस्तानियों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। साफ संदेश है कि अमेरिका ने अब पाकिस्तान को उसके हाल पर मरने के लिए अकेला छोड़ दिया है। तालिबानी हमलों की बढ़ती आहट के बीच वाशिंगटन से आए एक फैसले ने इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक हड़कंप मचा दिया है।
एक तरफ जहां तालिबान पेशावर पर अपना दावा ठोक रहा है, वहीं अमेरिका ने इस अशांत इलाके से अपना दूतावास (कंसोलेट) बंद करने का बड़ा ऐलान कर दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि अब खैबर पख्तूनख्वा से जुड़े तमाम रणनीतिक और राजनयिक कामकाज सिर्फ इस्लामाबाद से ही संचालित होंगे। यह महज एक दफ्तर को बंद करना नहीं, बल्कि पाकिस्तान की धरती से अपनी मौजूदगी कम करने का अमेरिका का सीधा और कड़ा संदेश है।
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इस कदम का सबसे घातक असर पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। पेशावर कोई सामान्य शहर नहीं है; यह दशकों से उग्रवाद, आतंकवाद और सीमा पार तनाव का मुख्य केंद्र रहा है। अब तक यहां अमेरिकी मौजूदगी पाकिस्तान के लिए एक अदृश्य ‘सुरक्षा कवच’ का काम करती थी, लेकिन अब अमेरिका ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। इससे अफगानिस्तान की ओर से आने वाले खतरों की तीव्रता बढ़ जाएगी। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे खूंखार आतंकी संगठन अब और अधिक सक्रिय होंगे, जिससे खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा नासूर बन सकता है। बता दें कि यह प्रांत पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा हिस्सा है और इसकी सीमाएं सीधे अफगानिस्तान से जुड़ती हैं। यहां के पश्तूनों के आपसी रिश्ते इतने गहरे हैं कि सीमा केवल नक्शों तक सीमित रह गई है। ऐसे में अफगानिस्तान में तालिबान की मजबूती का सीधा प्रहार अब पाकिस्तान के इस इलाके पर होगा।
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एक ओर जहां अमेरिका पाकिस्तान से दूरियां बना रहा है, वहीं दूसरी ओर वह भारत की ओर दोस्ती का हाथ तेजी से बढ़ा रहा है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनकी राजनीतिक जीत पर बधाई देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के लिए भारत की अहमियत क्या है। यह केवल एक औपचारिक फोन कॉल नहीं, बल्कि एक कड़ा संदेश था कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है।
यह बदलाव सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक भी है। भारत की कंपनियां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मा सेक्टर में अमेरिका के साथ मिलकर 1.5 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की जमीन तैयार कर रही हैं। यह निवेश न केवल अमेरिका में रोजगार पैदा करेगा बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी अभूतपूर्व मजबूती देगा। इन घटनाक्रमों ने एक बात शीशे की तरह साफ कर दी है—एक तरफ पाकिस्तान अस्थिरता और आतंक के दलदल में धंसता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत एक ‘ग्लोबल पार्टनर’ बनकर उभर रहा है। याद कीजिए, कुछ समय पहले तक अमेरिका पाकिस्तान को तवज्जो देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
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