नई दिल्ली के लिए अमेरिका का भरोसा: जयशंकर से मुलाकात में दोस्ती पर ज़ोर

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- News Desk
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अमेरिका बोला- भारत जरूरी, जयशंकर के साथ मीटिंग में दी दोस्ती की दुहाई

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर भारत-अमेरिका के बीच कूटनीतिक घमासान: क्या हैं मायने?

संयुक्त राष्ट्र महासभा की हलचल के बीच, जहां एक ओर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दांव-पेंच चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात ने दुनिया का ध्यान खींचा है। यह मुलाकात, ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका द्वारा भारत के विरुद्ध लिए जा रहे फैसलों और रिश्तों को लेकर दिए जा रहे बयानों के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। अमेरिका जहां एक ओर भारत के साथ दोस्ती का राग अलाप रहा है, वहीं दूसरी ओर उसके खिलाफ कड़े कदम उठा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच यह अहम बैठक संपन्न हुई।

ट्रंप के टैरिफ के बाद पहली मुलाकात: द्विपक्षीय संबंधों पर गरमागरम चर्चा

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें सत्र के दौरान, होटल में आयोजित इस मुलाकात में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने द्विपक्षीय रिश्तों और वैश्विक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों की पहली आमने-सामने की बातचीत थी। रविवार को न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर, यूएनजीए सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे और 27 सितंबर को महासभा को भारत का राष्ट्रीय संबोधन भी देंगे।

"लगातार जुड़ाव की आवश्यकता": कूटनीतिक समीकरणों का नया दौर?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुलाकात को "अच्छा" बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति के लिए निरंतर जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका साझेदारी को "महत्वपूर्ण आयात" बताते हुए रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, दवाइयों और दुर्लभ खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का वादा किया। रुबियो ने भारत को अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण देश करार देते हुए इंडो-पैसिफिक और क्वाड साझेदारी में मिलकर काम करने पर भी बल दिया। यह मुलाकात, मौजूदा तनाव के बीच, भविष्य में दोनों देशों के कूटनीतिक समीकरणों को नई दिशा देने का संकेत दे रही है।


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