संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत का तीखा पलटवार: पाकिस्तान को उसके ही आँगन में घेरा!
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर अपनी ही धरती के सच को छिपाकर दूसरों पर उंगली उठाना पाकिस्तान को भारी पड़ गया। भारत ने इस बार सीधे पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए उसके अपने ही देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का पर्दाफाश किया।
जिनेवा में UNHRC के 60वें सत्र की 34वीं बैठक में भारतीय राजनयिक मोहम्मद हुसैन ने पाकिस्तान के पाखंड को उजागर करते हुए कहा, "यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि पाकिस्तान जैसे देश, जो स्वयं मानवाधिकारों के उल्लंघन में लिप्त हैं, दूसरों को ज्ञान देने का प्रयास करते हैं। दुष्प्रचार फैलाने से बेहतर होगा कि पाकिस्तान अपनी ही जमीन पर अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का सामना करे।"
‘India finds it deeply ironic that a country like Pakistan seeks to lecture others on human rights. Instead of spreading propaganda, Pakistan should confront the persecution of minorities on their own soil,’ says India at the UN Human Rights Council pic.twitter.com/rcgvu0fe9L
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) October 1, 2025
**पाकिस्तान की पोल खोलता भारत: खैबर पख्तूनख्वा की घटना ने बढ़ाई मुश्किलें**
भारत का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुई एक भयावह घटना ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मानवाधिकार स्थिति को और भी सवालों के घेरे में ला दिया है। उत्तरी-पश्चिमी पाकिस्तान में, पाकिस्तानी तालिबान से जुड़े एक परिसर में हुए विस्फोट में महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 24 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए।
पुलिस जहां इसे एक सामान्य विस्फोट बता रही है, वहीं स्थानीय निवासियों और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की प्रांतीय शाखा का दावा है कि यह एक हवाई हमला या ‘जेट बमबारी’ थी, जिसने तिराह घाटी के मतुर दारा इलाके में पांच घरों को तबाह कर दिया। तिराह पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर जफर खान के अनुसार, इस घटना में 10 नागरिक और 14 आतंकवादी मारे गए। स्थानीय लोगों ने सरकारी अधिकारियों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया है।
**अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की बदहाल मानवाधिकार तस्वीर**
UNHRC सत्र में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अन्य अंतर्राष्ट्रीय आवाजों ने भी पाकिस्तान की मानवाधिकार चिंताओं को उठाया। अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीतिक शोधकर्ता जोश बोवेस ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में पाकिस्तान 158वें स्थान पर है। 2025 की USCIRF धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट के अनुसार, ईशनिंदा के आरोपों में 700 से अधिक लोग जेल में हैं, जो पिछले साल की तुलना में 300 प्रतिशत की वृद्धि है।
बोवेस ने बलूच लोगों की दयनीय स्थिति पर भी प्रकाश डाला। बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के मानवाधिकार निकाय ने अकेले 2025 की पहली छमाही में 785 लोगों के जबरन गायब होने और 121 हत्याओं का रिकॉर्ड दर्ज किया है। वहीं, पश्तून राष्ट्रीय जिरगा का दावा है कि 2025 में अभी भी 4000 पश्तून लापता हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ अजाकिया ने भी पाकिस्तान की मानवाधिकार स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में लंबे समय से सैन्य अभियान जारी हैं।
यह घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मानवाधिकारों के मुद्दे पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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