वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आज एक बड़ी हलचल देखने को मिली, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की। हालांकि इस रहस्यमयी बातचीत का ब्यौरा तो गुप्त रखा गया, लेकिन यह घटनाक्रम शी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई उस महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के तुरंत बाद आया, जिसमें दोनों दिग्गजों ने बढ़ती वैश्विक उठापटक के बीच अपनी साझेदारी को ‘स्थिरता का स्तंभ’ बताया। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन और शी ने अमेरिका को लेकर अपने साझा नजरिए पर मुहर लगाई। क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया कि करीब 1 घंटे 25 मिनट तक चली यह लंबी वार्ता बेहद सौहार्दपूर्ण और गहरे भरोसे से लबरेज रही।
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चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, शी जिनपिंग ने पुतिन को आगाह किया कि साल 2026 की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अस्थिरता का साया गहरा रहा है। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के हवाले से शी ने जोर दिया कि चीन और रूस को प्रमुख शक्तियों के रूप में अपनी सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए, ताकि उनके द्विपक्षीय संबंधों की दिशा निरंतर स्थिर और अडिग बनी रहे। वहीं, पुतिन ने शी जिनपिंग को अपना ‘प्रिय मित्र’ पुकारते हुए कहा कि मॉस्को और बीजिंग का यह गठबंधन वैश्विक मामलों में सुरक्षा कवच की तरह है। रूसी टेलीविजन पर अपने संबोधन में उन्होंने इस व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल करार दिया।
दिलचस्प बात यह है कि शी-पुतिन की यह डिजिटल मुलाकात उस वक्त हुई, जब अबू धाबी में रूसी, यूक्रेनी और अमेरिकी प्रतिनिधि करीब चार साल से जारी युद्ध को खत्म करने की जद्दोजहद में जुटे थे। 2022 से जारी यह भीषण संघर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे घातक अध्याय बन चुका है, जो तमाम राजनयिक कोशिशों के बावजूद अब भी एक जटिल गतिरोध बना हुआ है।
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वार्ता का यह नया दौर एक ऐसे नाजुक समय पर हो रहा है, जब रूस और अमेरिका के बीच बचा हुआ एकमात्र परमाणु हथियार समझौता गुरुवार को समाप्त होने वाला है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप और पुतिन परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए इस समझौते को विस्तार देंगे या इसकी शर्तों पर फिर से विचार करने का नया रास्ता चुनेंगे।
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