मिडिल ईस्ट में युद्ध के धमाके, भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स-निफ्टी औंधे मुंह गिरे, निवेशकों के करोड़ों डूबे
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते सैन्य संकट और ग्लोबल मार्केट से मिले निराशाजनक संकेतों ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी। ईरान और इज़राइल के बीच सीधा टकराव शुरू होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का डर सताने लगा है। इसका असर यह हुआ कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें देखते ही देखते 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं। तेल की इस तपिश और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं ने घरेलू निवेशकों के बीच ऐसी घबराहट पैदा की कि बाजार में चारों तरफ बिकवाली का दौर शुरू हो गया।
शुरुआती कारोबार में ही बाजार में चीख-पुकार मच गई। S&P BSE सेंसेक्स 803.67 अंक या 1.08% की भारी गिरावट के साथ 73,439.67 पर आ गिरा, जबकि NSE निफ्टी50 236.25 अंक या 1.01% फिसलकर 23,130.45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार का हर कोना लाल निशान में रंगा नजर आया और लगभग सभी दिग्गज शेयरों में गिरावट देखी गई। मिडिल ईस्ट में नए मोर्चे खुलने से तेल की कीमतें बढ़ने, महंगाई बेकाबू होने और ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ सुस्त पड़ने की चिंताओं ने निवेशकों को बैकफुट पर धकेल दिया।
आखिर क्यों बाजार में मची है आज मंदी की चीख?
सोमवार की इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी और मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में फिर से भड़की युद्ध की आग है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, ग्लोबल और घरेलू दोनों ही मोर्चों पर बाजार दबाव में है।
उन्होंने बताया, “इस हफ्ते की शुरुआत ही चुनौतियों से भरी रही। पिछले शुक्रवार को अमेरिकी नैस्डैक में आई 4.18% की भीषण गिरावट ने दुनिया भर के बाजारों को हिला दिया, जिसका असर आज दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे टेक-प्रधान बाजारों में भारी बिकवाली के रूप में दिख रहा है। वहीं, वेस्ट एशिया में संघर्ष का दायरा बढ़ने और लेबनान में इज़राइली कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों ने आग में घी का काम किया है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड $96 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है।”
बता दें कि वीकेंड के दौरान बेरूत पर इज़राइली हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संघर्ष जल्द शांत होने वाला नहीं है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चैन टूटने की आशंका और गहरी हो गई है।
नतीजतन, ब्रेंट क्रूड ऑयल $96 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए किसी झटके से कम नहीं है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा मतलब है—महंगाई बढ़ना, रुपये की वैल्यू गिरना और देश की आर्थिक रफ्तार पर ब्रेक लगना।
सिर्फ युद्ध ही नहीं, अमेरिकी टेक शेयरों का धराशायी होना भी चिंता का बड़ा विषय रहा। शुक्रवार को नैस्डैक 4% से ज्यादा टूटा, जिससे एशियाई बाजारों में हड़कंप मच गया। इसके साथ ही, अमेरिका में आए मजबूत जॉब डेटा ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि अब यह माना जा रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है।
सेक्टर्स का हाल: हर तरफ सिर्फ ‘लाल निशान’
बाजार में बिकवाली का आलम यह था कि लगभग हर सेक्टर लहूलुहान नजर आया:
- Nifty Realty: सबसे ज्यादा 1.93% की मार झेली।
- Nifty IT और Metal: क्रमशः 1.72% और 1.67% की गिरावट के साथ पस्त दिखे।
- Nifty Auto, Oil & Gas और Financial Services: भी 0.87% से 1.39% तक टूट गए।
ब्रॉडर मार्केट भी इस दबाव से बच नहीं पाया। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.86% और स्मॉलकैप 100 में 0.62% की गिरावट दर्ज की गई। सबसे चौंकाने वाली बात ‘India VIX’ (डर का पैमाना) में दिखी, जो 9% से ज्यादा उछल गया, जो साफ तौर पर निवेशकों के बीच फैली भारी घबराहट का सबूत है।
दिग्गज शेयरों का पतन: M&M और TATA STEEL सबसे आगे
सेंसेक्स के शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) 2.26% की गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर रहा। इसके अलावा:
- Tata Steel: 2.06% टूटा।
- IndiGo: 2.04% गिरा।
- TCS और Infosys: क्रमशः 1.83% और 1.50% नीचे आ गए।
- HCL Tech, L&T और Maruti Suzuki: भी एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए।
धराशायी बाजार में ‘सन फार्मा’ ने दिखाया दम
चौतरफा बिकवाली के इस तूफान में भी ‘सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज’ (Sun Pharma) चट्टान की तरह खड़ा रहा और 0.64% की मजबूती के साथ टॉप गेनर बना। एक्सिस बैंक ने भी बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और सपाट स्तर पर टिके रहने में कामयाब रहा।
डॉ. विजयकुमार का मानना है कि यदि बिकवाली बढ़ती है, तो भारतीय बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों से सहारा मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा, “अमेरिका में गिरावट मुख्य रूप से टेक सेक्टर तक सीमित थी, जिससे निवेश अब AI-बेस्ड ट्रेड से हटकर नॉन-AI सेक्टर की तरफ मुड़ सकता है, जो भारत के लिए अच्छा है। साथ ही, FY26 में 7.7% की अनुमानित GDP ग्रोथ और मजबूत तिमाही नतीजे बाजार को फिर से संभाल सकते हैं।”
फिलहाल, निवेशकों की नजरें मिडिल ईस्ट की मिसाइलों, कच्चे तेल की चाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले संकेतों पर टिकी हैं। अगर युद्ध का तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी दिख सकती है, अन्यथा तेल की महंगाई आने वाले दिनों में बाजार को और नीचे धकेल सकती है।
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