समुद्री खजाने पर भारत का नया परचम: गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के नियम अधिसूचित
भारत, अपनी विशाल समुद्री सीमाओं के साथ, एक असीम समुद्री संपदा का धनी है। इस अनमोल धरोहर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नए, व्यापक नियम अधिसूचित किए गए हैं, जो भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात करेंगे।
स्वदेशी सशक्तिकरण, विदेशी हस्तक्षेप पर अंकुश
इन नए नियमों का केंद्रीय भाव है – हमारे अपने मछुआरों, सहकारी समितियों और छोटे उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाना। साथ ही, यह पहल विदेशी जहाजों द्वारा भारतीय जल में अनियंत्रित मछली पकड़ने पर प्रभावी अंकुश लगाने का भी लक्ष्य रखती है। चार नवंबर को जारी किए गए ये नियम, बजट 2025-26 की उन महत्वपूर्ण घोषणाओं का हिस्सा हैं, जिनसे भारत के समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र में नए और सुनहरे अवसर खुलने की उम्मीद है।
तकनीकी प्रगति, स्वदेशी भागीदारी को प्राथमिकता
नए नियमों के तहत, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए तकनीकी रूप से उन्नत जहाजों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें मछुआरा सहकारी समितियों और मछली किसान उत्पादक संगठनों (FFPO) को विशेष प्राथमिकता दी गई है, ताकि वे इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकें।
सरल आवेदन, सुगम प्रक्रिया
नाव मालिकों के लिए आवेदन प्रक्रिया को अत्यंत सरल और समयबद्ध बनाया गया है। अब वे आसानी से आवेदन कर सकते हैं और अपनी आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन भी देख सकते हैं। यह सुविधा, देश में पहले से ही पोर्टल पर पंजीकृत लगभग 2.38 लाख मछली पकड़ने वाली नावों के लिए एक बड़ी राहत है। यह पोर्टल, समुद्री उत्पाद निर्यात प्राधिकरण (MPEDA) और निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) से भी जुड़ा है, जो मछली पकड़ने और स्वास्थ्य संबंधी प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाएगा।
समग्र विकास, वैश्विक पहुंच
सरकार मछुआरों को सिर्फ़ नियम-कायदों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उनके समग्र विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। इसमें प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने, मूल्य संवर्धन (value addition), विपणन (marketing) और निर्यात (export) के क्षेत्र में व्यापक सहायता प्रदान की जाएगी। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले सभी जहाजों में ट्रांसपोंडर और क्यूआर कोड युक्त आधार/मछुआरा पहचान पत्र अनिवार्य किया गया है, ताकि संचालन में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
यह पहल भारत को समुद्री संपदा के उपयोग में एक नई दिशा देने और अपने मछुआरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
