भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से एक बार फिर राहत भरी खबर आई है। रिज़र्व बैंक (RBI) के ताज़ा ‘साप्ताहिक सांख्यिकी अनुपूरक’ के मुताबिक, 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 392 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़त के साथ 687.193 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। भंडार में आई यह तेजी मुख्य रूप से सोने की चमक (स्वर्ण भंडार में उछाल) के कारण संभव हुई है, जिसने विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में आई गिरावट के असर को कम कर दिया। पिछले कुछ हफ्तों के ट्रेंड को देखें तो, इक्का-दुक्का मौकों को छोड़कर भारत का विदेशी मुद्रा कोष लगातार मजबूती की ओर बढ़ रहा है।
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भारत का यह विदेशी मुद्रा खजाना सितंबर 2024 में हासिल किए गए अपने ऐतिहासिक स्तर 704.89 अरब डॉलर के बेहद करीब बना हुआ है। 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, भंडार के सबसे बड़े हिस्से यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में 1.124 अरब डॉलर की कमी आई और यह 550.866 अरब डॉलर पर आ गया। हालांकि, इस कमी की भरपाई स्वर्ण भंडार में आई जोरदार तेजी ने कर दी।
आंकड़ों के अनुसार, देश का स्वर्ण भंडार वर्तमान में 1.568 अरब डॉलर बढ़कर 112.830 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में वैश्विक अनिश्चितताओं और मजबूत निवेश मांग के कारण हालिया महीनों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। आरबीआई ने अपनी पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में आश्वस्त किया था कि भारत के पास 11 महीनों से अधिक के आयात बिल को चुकाने के लिए पर्याप्त विदेशी पूंजी उपलब्ध है। कुल मिलाकर, भारत का बाह्य आर्थिक क्षेत्र बेहद सुदृढ़ है और आरबीआई किसी भी बाहरी वित्तीय चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
दिलचस्प बात यह है कि अकेले साल 2025 में ही अब तक विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 56 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है।
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अगर बीते वर्षों पर नज़र डालें तो 2024 में भंडार में 20 अरब डॉलर और 2023 में करीब 58 अरब डॉलर का इजाफा हुआ था। हालांकि, 2022 में इसमें 71 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट देखी गई थी। दरअसल, विदेशी मुद्रा भंडार (FX Reserves) किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई वे संपत्तियां हैं, जो मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ यूरो, जापानी येन और पाउंड स्टर्लिंग जैसी अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के रूप में होती हैं, और वैश्विक व्यापारिक लेनदेन में सुरक्षा कवच का काम करती हैं।
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