भारत-रूस की दोस्ती का नया अध्याय: सीमा-शुल्क सहयोग और कृषि क्षेत्र में मजबूती
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दोनों देशों के सीमा-शुल्क अधिकारियों ने माल एवं वाहनों की सुगम आवाजाही के लिए आगमन-पूर्व सूचना के आदान-प्रदान पर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी और रूस की संघीय सीमा-शुल्क सेवा (एफसीएस) की उप प्रमुख तातियाना मर्कुशोवा ने 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के अवसर पर इस समझौते को अंतिम रूप दिया।
यह समझौता सीमा शुल्क को जोखिमों का बेहतर आकलन करने और माल की अग्रिम प्रक्रिया में सहायता करेगा, जिससे सीमा पर माल की निकासी अधिक तीव्र और सुरक्षित हो सकेगी। सीबीआईसी ने ‘एक्स’ पर इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे व्यापार सुविधा मजबूत होगी और सीमापार आवागमन में सुरक्षा, पारदर्शिता एवं समग्र दक्षता में वृद्धि होगी।
कृषि क्षेत्र में भी बढ़ी साझेदारी:
सीमा-शुल्क समझौते के साथ-साथ, भारत और रूस ने कृषि क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रूसी कृषि मंत्री ओक्साना लुट से मुलाकात कर आधुनिक खेती, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। चौहान ने लुट से मिलकर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह मुलाकात कृषि में भारत-रूस सहयोग को मजबूत करने के नए रास्ते खोलेगी।
इसके अतिरिक्त, भारत के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं दुग्ध मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी रूसी कृषि मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में मत्स्य पालन, पशु और दुग्ध उत्पादों के आपसी व्यापार को बढ़ाने, बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को सुलझाने और निर्यात को गति देने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन की भारत यात्रा के दौरान ये महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। चार वर्षों के अंतराल के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों में एक नए उत्साह का संचार कर रही है।
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