भारत-अमेरिका व्यापार की नई उड़ान: इलेक्ट्रॉनिक्स और एआई क्रांति में दुनिया का नेतृत्व करेंगे दोनों देश
भारत और अमेरिका के बीच शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर मुहर लगने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों में एक नए युग की शुरुआत हुई है। इस ऐतिहासिक कदम पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जोर देकर कहा कि भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और बौद्धिक संपदा (आईपी) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। भारत-अमेरिका के इस संयुक्त बयान में व्यापार की राह में रोड़ा बनने वाली ‘गैर-शुल्क बाधाओं’ को हटाने का पुरजोर आह्वान किया गया है।
विशेष रूप से, यह समझौता अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के निर्यात में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर केंद्रित है। इस समझौते के दूरगामी परिणामों पर चर्चा करते हुए वैष्णव ने स्पष्ट किया कि वाणिज्य मंत्रालय इसके विवरणों का मुख्य केंद्र है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स के मोर्चे पर भारत बेहद गंभीरता से अपनी भागीदारी निभा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने भारत के दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा, “हम इलेक्ट्रॉनिक्स और आईपी के मोर्चे पर वैश्विक मानकों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। हमारा मंत्र ‘सह-विकास और सह-निर्माण’ है। भारत न केवल बौद्धिक संपदा का सम्मान करता है, बल्कि नवाचार के मामले में आज पूरी दुनिया को नए उत्पाद और तकनीक देने की क्षमता रखता है।” बयान में यह भी तय किया गया है कि अगले छह महीनों के भीतर अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मानकों की स्वीकार्यता पर सकारात्मक नतीजे लाए जाएंगे, ताकि भारत में अमेरिकी निर्यात की प्रक्रिया सुगम हो सके।
तकनीकी मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) और डेटा सेंटर के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार है। वैष्णव ने भविष्य की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि डेटा सेंटर आने वाले समय में विकास का सबसे बड़ा इंजन साबित होंगे। उन्होंने बताया कि ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत भारत पहले ही 34,000 जीपीयू की व्यवस्था कर चुका है और जल्द ही इसमें 20,000 और इकाइयां जोड़ी जाएंगी।
निवेश के बढ़ते आंकड़ों पर खुशी जताते हुए मंत्री ने कहा, “अब तक 70 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता मिल चुकी है, जो नई घोषणाओं के साथ 90 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। मुझे विश्वास है कि आने वाले महीनों में यह आंकड़ा 200 अरब डॉलर की सीमा को पार कर जाएगा।” यह निवेश न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि देश के युवा स्टार्टअप्स के लिए संभावनाओं के नए द्वार भी खोलेगा।
हाल के महीनों में टेक दिग्गजों ने भी भारत पर बड़ा दांव लगाया है; गूगल ने 15 अरब डॉलर, माइक्रोसॉफ्ट ने 17 अरब डॉलर, अमेजन ने 35 अरब डॉलर और डिजिटल कनेक्शन ने 11 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। वैष्णव के अनुसार, डेटा सेंटर में यह भारी निवेश ‘एआई आर्किटेक्चर’ की पांचों परतों को मजबूती देगा, जिससे हमारे स्टार्टअप्स स्वदेशी कंप्यूट सुविधाओं का लाभ उठाकर दुनिया के लिए बेहतरीन डिजिटल समाधान तैयार कर सकेंगे।
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