RBI का बड़ा कदम: रेपो रेट में कटौती, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा!
नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार, 5 दिसंबर, 2025 को एक अहम घोषणा करते हुए बताया कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.25 प्रतिशत करने का फैसला किया है। यह निर्णय MPC की FY26 के लिए आयोजित पांचवीं दो-मासिक बैठक के दौरान लिया गया, जो 3 दिसंबर से 5 दिसंबर तक चली।
RBI पॉलिसी का नज़रिया:
इस महत्वपूर्ण कदम के साथ, RBI ने ‘न्यूट्रल’ नीतिगत रुख को भी बरकरार रखा है। केंद्रीय बैंक ने वितीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने GDP ग्रोथ अनुमान को भी पहले के 6.8% से बढ़ाकर प्रभावशाली 7.3% कर दिया है। साथ ही, FY26 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई के अनुमान को भी आश्चर्यजनक रूप से 2.6% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
यह छठी बार है जब RBI ने फरवरी 2025 से शुरू होकर, रेपो रेट में कटौती की है। कुल मिलाकर, इस अवधि में मुख्य शॉर्ट-टर्म लेंडिंग रेट (रेपो) में 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की जा चुकी है, जो घटते कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के परिदृश्य के बीच एक स्वागत योग्य कदम है।
पिछली बैठकों का सार:
अपने अक्टूबर की नीति समीक्षा में, MPC ने रेपो रेट को 5.50% पर अपरिवर्तित रखा था और ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखा था। उस समय, FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% किया गया था, जबकि CPI महंगाई का अनुमान 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया गया था।
MPC के फैसलों के मुख्य अंश:
- रेपो रेट में कटौती: रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.5 प्रतिशत किया गया।
- चौथी बार कटौती: फरवरी 2025 से यह रेपो दर में चौथी बार कटौती है, जिससे कुल कटौती 1.25 प्रतिशत हो गई है।
- तटस्थ रुख जारी: MPC ने मौद्रिक नीति का तटस्थ रुख जारी रखने का निर्णय लिया है।
- GDP ग्रोथ का बढ़ा अनुमान: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया गया।
- महंगाई का घटा अनुमान: चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है।
- नीतिगत गुंजाइश: आर्थिक वृद्धि की गति का समर्थन करने के लिए नीतिगत गुंजाइश मौजूद बताई गई।
- आर्थिक गतिविधि की निरंतरता: प्रमुख आंकड़ों से तीसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधि बरकरार रहने के संकेत मिले हैं।
- नकदी प्रबंधन: RBI खुले बाजार परिचालन के तहत नकदी प्रबंधन के लिए एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा।
- डॉलर-रुपया अदलाबदली: रिजर्व बैंक तीन साल की अवधि वाला पांच अरब डॉलर का ‘खरीब-बिक्री’ डॉलर-रुपया अदलाबदली करेगा।
- बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती: बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता मजबूत बनी हुई है।
- तरलता की प्रतिबद्धता: बैंकिंग प्रणाली के लिए समुचित और टिकाऊ नकदी मुहैया कराने के लिए आरबीआई प्रतिबद्ध है।
- चालू खाता घाटा: वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चालू खाता घाटा नरम रहने की उम्मीद है।
- विदेशी मुद्रा भंडार: 28 नवंबर, 2025 तक विदेशी मुद्रा भंडार 686.2 अरब डॉलर था।
- अगली बैठक: MPC की अगली बैठक चार से छह फरवरी, 2026 को निर्धारित है।
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