अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की सुगबुगाहट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने की खबरों ने भारतीय शेयर बाजार में नई जान फूंक दी है। हर तरफ हुई चौतरफा खरीदारी के दम पर बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी ने आज शानदार बढ़त के साथ सत्र का समापन किया। 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 736.38 अंक (0.97%) की छलांग लगाकर 76,236.38 के स्तर पर बंद हुआ। ट्रेडिंग के दौरान बाजार में जबरदस्त हलचल रही और सेंसेक्स 76,821.07 के शिखर को छूने के बाद 76,140.44 के निचले स्तर तक आया। दूसरी ओर, 50 शेयरों वाले NSE निफ्टी ने भी 231 अंकों (0.98%) की तेजी दर्ज की और 23,853.9 पर थमा। व्यापक बाजार में BSE मिडकैप इंडेक्स 1.66% की बढ़त के साथ चमका, हालांकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.27% की मामूली गिरावट देखी गई। भू-राजनीतिक तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ।
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मार्केट के ‘सुपरस्टार्स’ और पिछड़ने वाले शेयर
सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में ट्रेंट, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट और एटरनल आज के टॉप गेनर्स रहे। ट्रेंट के शेयरों में 5.35 प्रतिशत की जबरदस्त रैली देखी गई। इसके विपरीत, NTPC, ICICI बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स और सन फार्मा जैसे दिग्गजों को बिकवाली का सामना करना पड़ा। NTPC 1.64 प्रतिशत टूटकर सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा। बाजार के मूड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेंसेक्स के 22 शेयर हरे निशान में रहे, जबकि सिर्फ 4 में गिरावट आई। निफ्टी 50 के 34 शेयरों ने बढ़त बनाई, जबकि 16 शेयर लाल निशान में बंद हुए। वैश्विक स्तर पर, US-ईरान टकराव खत्म होने की उम्मीद ने इक्विटी बाजारों को ‘बूस्टर डोज’ दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी नीचे आ गए हैं।
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एशियाई बाजारों में भी आज उत्सव जैसा माहौल रहा; दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 5% से ज्यादा उछला, तो जापान का निक्केई 225 भी लगभग 5% की बढ़त के साथ बंद हुआ। चीन का शंघाई और हांगकांग का हैंग सेंग भी बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे। कच्चे तेल में गिरावट और मजबूत होते रुपये ने स्थानीय निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, जिससे घरेलू बाजार में नई उम्मीद जगी है। इक्विरस वेल्थ के MD और बिजनेस हेड अंकुर पुंज के अनुसार, निवेशकों को भरोसा है कि यदि युद्ध के बादल छंटते हैं और तेल की कीमतें कम रहती हैं, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FIIs) जल्द ही भारतीय बाजारों में बड़े निवेश के साथ वापसी करेंगे।
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