गोविंदगंज: आठ प्रत्याशियों के साथ गरमाई चुनावी बिसात!

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
गोविंदगंज: आठ प्रत्याशियों के साथ गरमाई चुनावी बिसात!
Govindganj Assembly Seat: गोविंदगंज सीट पर रोचक हुई चुनावी जंग, चुनावी मैदान में उतरे 8 उम्मीदवार

पूर्वी चंपारण का गोविंदगंज: त्रिकोणीय मुकाबले में दिलचस्प हुई चुनावी जंग!

पूर्वी चंपारण जिले की गोविंदगंज विधानसभा सीट पर इस बार का चुनावी रणभूमि आग उगल रही है! वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सुनील मणि तिवारी का विधायक पद पर आसीन होना, इस सीट को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। लेकिन, एनडीए में सीट बंटवारे के बाद यह सीट चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के खाते में जाने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। वहीं, महागठबंधन की ओर से कांग्रेस पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। इस गहमागहमी के बीच, प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी की एंट्री ने मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है। सबसे खास बात यह है कि गोविंदगंज सीट पर इस बार किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार ने ताल नहीं ठोकी है। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले का फैसला 11 नवंबर को होने वाले मतदान से होगा।

आठ योद्धा, एक ताज: कौन बनेगा गोविंदगंज का सरताज?

गोविंदगंज विधानसभा सीट पर कुल आठ उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। एलजेपी (रामविलास) की ओर से राजू तिवारी, जिन्हें पिछले चुनाव में जनता का प्यार मिला था, एक बार फिर मैदान में हैं। कांग्रेस ने शशि भूषण राय पर दांव लगाया है, जो पार्टी की उम्मीदों को पंख लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, ‘जन सुराज’ के कृष्ण कांत मिश्रा, जिनके तेवर काफी आक्रामक हैं, चुनावी मैदान में अपनी अलग छाप छोड़ने की जुगत में हैं। इनके अलावा, तेज प्रताप यादव की ‘जनशक्ति जनता दल’, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, जो चुनावी समीकरणों को और भी जटिल बना सकती हैं।

इतिहास के पन्नों से: गोविंदगंज की चुनावी कहानी

गोविंदगंज, जो एक सामान्य (जनरल) सीट है और पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, का अपना एक समृद्ध चुनावी इतिहास रहा है। साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में, भाजपा के सुनील मणि तिवारी ने यहां से जीत का परचम लहराया था। उससे पहले, 2015 के चुनाव में एलजेपी के राजू तिवारी ने जनता का विश्वास जीता था। वहीं, 2010 के दशक में, जदयू की मीना द्विवेदी ने इस सीट पर अपना दबदबा कायम किया था।

वैसे तो गोविंदगंज विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है। लेकिन, इस बार के सीट बंटवारे ने खेल का रुख पूरी तरह मोड़ दिया है। यह सीट चिराग पासवान की पार्टी के हाथ आने से, चिराग पासवान इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी, चिराग की राह में कांटे बिछाने और अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इन दोनों की टक्कर में ‘जन सुराज’ की भूमिका भी कम नहीं आंकी जा सकती, जो इस बार के चुनाव को कई मायनों में यादगार बनाने वाली है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *