घाटशिला उपचुनाव: झारखंड की सियासत में गरमाई गर्मी, नामांकन के साथ शुरू हुआ घमासान!
जमशेदपुर: झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है और राज्य का सियासी पारा चढ़ने लगा है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा और सत्ताधारी झामुमो के उम्मीदवारों ने शुक्रवार को अपने-अपने पर्चे दाखिल कर दिए हैं, जिसके साथ ही चुनावी रणभेरी बज गई है। दोनों ही पार्टियों ने इस मौके पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी, जिसमें उनके दिग्गज नेता भी शामिल हुए।
भाजपा के बाबूलाल सोरेन ने भरी हुंकार, जनता सरकार से ‘तंग’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन ने नामांकन दाखिल करते समय प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन का साथ लिया। नामांकन के बाद उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए मौजूदा सरकार पर तीखा प्रहार किया। बाबूलाल सोरेन ने कहा, "घाटशिला की जनता इस सरकार से पूरी तरह तंग आ चुकी है। यह सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।" यह भी गौरतलब है कि बाबूलाल सोरेन 2024 के विधानसभा चुनावों में इसी घाटशिला सीट से दिवंगत रामदास सोरेन से हार का सामना कर चुके हैं।
झामुमो की ओर से हेमंत सोरेन का साथ, ‘बदलाव’ की लहर की बात
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार सोमेश सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में अपना पर्चा भरा। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनता से बदलाव की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी इसी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि घाटशिला की जनता बदलाव चाहती है, क्योंकि वर्तमान सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में नाकाम रही है।
एनडीए की जीत से बढ़ेगा मनोबल: सरयू राय
जदयू विधायक सरयू राय ने इस उपचुनाव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अगर एनडीए का उम्मीदवार घाटशिला सीट जीतता है, तो इससे निश्चित रूप से विपक्षी दलों का हौसला बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह जीत विधानसभा में हमारी आवाज़ को और मज़बूत करेगी और सत्तारूढ़ सरकार की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफलता को भी उजागर करेगी।
दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के निधन से खाली हुई सीट
यह सीट झामुमो विधायक और झारखंड के शिक्षा मंत्री रहे रामदास सोरेन के अगस्त में हुए निधन के कारण खाली हुई थी। रामदास सोरेन पूर्वी सिंहभूम जिला समिति के अध्यक्ष भी थे। अब उनके बड़े बेटे सोमेश सोरेन को झामुमो ने इस सीट से उम्मीदवार बनाया है।
घाटशिला उपचुनाव 2025: नया अध्याय लिखने को तैयार!
यह उपचुनाव झारखंड की राजनीतिक दिशा तय करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है। मतदाताओं का फैसला आने वाले समय में सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन को प्रभावित करेगा। जनता किसके साथ है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन घाटशिला की जनता का फैसला प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय जरूर लिखेगा।
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