भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह का राजनीतिक सफर: रियलिटी शो से विधायकी तक का रोमांचक सफर!
क्या आपको याद है, एक हफ्ता पहले पवन सिंह ने अचानक एक रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ से वॉकआउट कर लिया था? वे शो में सबसे दमदार कंटेस्टेंट थे, और उनके जाने से इंस्टाग्राम पर ‘सलमान खान की धरती हिल गई’ जैसी चर्चाएं आम हो गईं। बिग बॉस पर पवन सिंह भारी पड़ने लगे थे, लेकिन उनके शो छोड़ने से लोगों को लगा कि ‘आला कमान’ का बुलावा आ गया है – वही आला कमान, जिसने 2024 में उन्हें लोकसभा सीट से वंचित रखा था। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या पवन सिंह को विधायकी का टिकट फाइनल हो गया है?
4 सितंबर 2017: बीजेपी की ‘भोजपुरी’ रणनीति की शुरुआत
यह कहानी शुरू होती है 8 साल पहले, 4 सितंबर 2017 को। बीजेपी भोजपुरी जगत के दिग्गज सिंगर्स और एक्टर्स को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही थी। रवि किशन, जो कभी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके थे, भगवा रंग में रंगे गए। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष बनने की राह पर निकले मनोज तिवारी, और योगीजी के साथ फ्लाइट में बैठे दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ भी सुगबुगाहट तेज हो गई थी।
केवल पवन सिंह और खेसारी लाल यादव ही बचे थे। खेसारी अपने पत्ते नहीं खोल रहे थे, लेकिन बाकी भोजपुरिया तिकड़ी ने पवन को साध लिया। 4 सितंबर 2017 को पटना में, पवन सिंह को पीले परिधान और भगवा गमछे में देखा गया।
लेकिन फिर पवन ‘भुला’ गए। कहा जाता है कि यह उनकी आदत है – दोस्तों के लिए कुछ भी कर देना। 2017 में बीजेपी में शामिल होने के बाद, वह शायद अपने गानों, फिल्मों और निजी जिंदगी के विवादों में उलझ गए।
‘हमके जॉइन करा के इ सब त बड़का पॉलिटीशियन बनल जा हौव स…’
जब पवन सिंह की आंखें खुलीं, तो उन्होंने महसूस किया कि भोजपुरी सिंगिंग और सिनेमा जगत से जिन्हें उन्होंने बाहर का रास्ता दिखाया था, वे सब नेतागिरी में बहुत आगे निकल चुके हैं। तब उन्होंने 2024 में फैसला किया: ‘हमहू कौनो से कम न रहब!’
2024 में जब उन्होंने चुनाव लड़ने की जिद पकड़ी, तो बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई। एक ओर, उनका सीधा और अड़ियल अंदाज, जो राजनीतिक दांव-पेंच से कोसों दूर था। दूसरी ओर, बीजेपी ने बंगाल के आसनसोल से उनके टिकट की घोषणा कर दी, जिसके सामने टीएमसी ने शत्रुघ्न सिन्हा को खड़ा कर दिया। पवन ने टिकट लौटाने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि वे आरा (उनके घर के पास) की काराकाट लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। लेकिन बीजेपी ने यह सीट अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दे रखी थी, जिसके प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा खुद वहां से चुनाव लड़ रहे थे। तो फिर पवन का क्या होता? बीजेपी ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी, और शायद कुछ साल तक पार्टी में न लेने का नियम भी बना दिया।
इशारा तो इस साल फरवरी में ही हो गया था, शायद सही मौके का इंतजार था
बीजेपी से पवन सिंह खफा हैं या नहीं, यह कहना मुश्किल है। लेकिन बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने 4 फरवरी को एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर पवन सिंह 2024 के चुनाव में पार्टी से बगावत न करते और आसनसोल से चुनाव लड़ते, तो आज वे लोकसभा सांसद होते।
इधर, विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही, पवन सिंह के करीबी रितेश पांडेय और अनुपमा यादव ‘जन सुराज’ में शामिल हो गए। पवन सिंह एक रियलिटी शो में नजर आए, जहां उनका प्रदर्शन शानदार रहा। इससे यह आभास हुआ कि शायद उनकी विधायकी चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है। बीच-बीच में उनकी पत्नी ज्योति सिंह को विधायकी लड़ाने की खबरें भी आईं, लेकिन ज्योति ने खुद इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर कहा कि उनकी पवन सिंह से काफी समय से बात नहीं हुई है।
फिर रातोंरात क्या हुआ पवन भाई? टिकट फाइनल है क्या?
अचानक खबर आई कि रियलिटी शो पर पवन सिंह की मां आईं और उन्हें अपने साथ ले गईं। बस, फिर क्या था, हल्ला मच गया कि पवन भइया चुनाव लड़ने वाले हैं। लेकिन किसी ने भी पत्ते नहीं खोले।
अब यह कहा जा रहा है कि शाहाबाद सीट पर, 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को नुकसान हुआ था। बीजेपी शाहाबाद में अपनी खोई हुई ताकत वापस पाना चाहती है, और अमित शाह का पूरा ध्यान इसी क्षेत्र पर है।
क्या इस काम के लिए पवन सिंह को चुना गया है? यह सवाल थोड़ा अजीब है। आज उनकी मुलाकात अमित शाह से नहीं, बल्कि उपेंद्र कुशवाहा से होने वाली है – वही उपेंद्र कुशवाहा, जिनके खिलाफ पवन ने एक साल पहले चुनाव लड़ा था। हालांकि, अवेयर मीडिया न्यूज़ कॉन्क्लेव में जब उपेंद्र कुशवाहा से पूछा गया था कि क्या वे पवन सिंह के गाने सुनते हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था कि वे वाकई अच्छा गाते हैं।
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