पंकज धीर: ‘कर्ण’ के रूप में जन-जन में बसे, लेकिन एक अधूरे वादे ने ली थी परिवार की खुशियां!
नई दिल्ली: ‘महाभारत’ में सूर्यपुत्र कर्ण के अविस्मरणीय किरदार से घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता पंकज धीर अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर से पूरा फिल्म और टीवी जगत सदमे में है। आज भी लाखों लोग उन्हें उनके निभाए गए किरदार ‘कर्ण’ के रूप में याद करते हैं।
‘कर्ण’ के नाम के मंदिर, लेकिन…
पंकज धीर का क्रेज इतना था कि करनाल और बस्तर जैसे शहरों में उनके नाम के मंदिर भी बने हुए थे, जहाँ उन्हें भगवान कर्ण के रूप में पूजा जाता था। लेकिन इस सफलता और आदर के पीछे एक ऐसा दौर भी छिपा था जब पंकज धीर के परिवार को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था।
गीता बाली की वजह से आई थीं परेशानियां!
पंकज धीर और उनके परिवार की मुश्किलें प्रसिद्ध अभिनेत्री गीता बाली की वजह से आईं। पंकज धीर के पिता, सी.एल. धीर, उस दौर के जाने-माने निर्देशक थे। उन्होंने दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम के साथ काम करने के बाद ‘बहू बेटी’, ‘रैन बसेरा’, ‘आखिरी रात’ और ‘जिंदगी’ जैसी कई सफल फिल्मों का निर्देशन और निर्माण किया था।
‘रानो’ की अधूरी कहानी और पिता का वादा
जब सी.एल. धीर ने गीता बाली के साथ फिल्म ‘रानो’ बनाने का फैसला किया, तो किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि पूरा परिवार मुश्किलों में घिर गया। एक इंटरव्यू में पंकज धीर ने बताया था कि ‘रानो’ के वे सह-निर्माता थे, और दोनों ने बराबर पैसा लगाया था। निर्देशन की जिम्मेदारी सी.एल. धीर पर थी। फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी, बस गीता बाली के हिस्से की तीन दिन की शूटिंग बाकी थी। तभी गीता बाली पंजाब में चेचक (स्मॉलपॉक्स) की चपेट में आ गईं।
मौत के मुहाने पर किया गया वादा, जिसने सब कुछ बदल दिया
गीता बाली की हालत बिगड़ती चली गई और मुंबई लाए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में, गीता बाली ने सी.एल. धीर से वादा लिया कि उनके जाने के बाद फिल्म को वहीं छोड़ दिया जाए। सी.एल. धीर ने इस वादे को निभाया, और ‘रानो’ कभी पूरी नहीं हो सकी।
दिग्गज कलाकारों की गुजारिश भी अनसुनी!
गीता बाली की मौत के बाद, दिलीप कुमार और मीना कुमारी सी.एल. धीर से मिलने आए। उन्होंने फिल्म को मीना कुमारी के साथ पूरा करने का अनुरोध किया, ताकि इतनी मेहनत और पैसा बर्बाद न हो। दिलीप कुमार ने तो यह तक कहा कि वे खुद दर्शकों से मीना कुमारी को इस किरदार में स्वीकार करने की अपील करेंगे। लेकिन सी.एल. धीर अपने वादे पर अडिग रहे। उन्होंने कहा कि फिल्म गीता बाली के साथ ही खत्म हो गई थी।
आर्थिक तंगी और पिता का अवसाद
इस फैसले का नतीजा यह हुआ कि फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई और सारा पैसा डूब गया। परिवार पर आर्थिक संकट आ गया और सी.एल. धीर गहरे अवसाद में चले गए। उस मुश्किल दौर में, कम उम्र के पंकज धीर ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और जल्द ही काम शुरू किया ताकि घर चल सके। इस घटना ने उन्हें जिम्मेदार और मजबूत बनाया।
कैंसर से अंतिम जंग
गत 15 अक्टूबर 2025 को 68 वर्ष की आयु में पंकज धीर का निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। कुछ साल पहले वे इस बीमारी से उबर चुके थे, लेकिन हाल के महीनों में कैंसर फिर से लौट आया था और उनकी हालत बिगड़ती चली गई। सर्जरी के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पंकज धीर की जिंदगी यह सिखाती है कि सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी होती है। उनके पिता का गीता बाली से किया गया वादा, भले ही परिवार के लिए आर्थिक तंगी लेकर आया, लेकिन उस ईमानदारी और इंसानियत की मिसाल आज भी याद की जाती है।
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