बॉलीवुड के हास्य सम्राट ‘जेलर’ असरानी का 84 वर्ष की आयु में निधन: एक युग का अंत
नई दिल्ली: 20 अक्टूबर 2025 को, भारतीय सिनेमा ने अपना एक और अनमोल सितारा खो दिया। हास्य की दुनिया के बेताज बादशाह, गोवर्धन ‘असरानी’ का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। दिवाली के उल्लास भरे माहौल के बीच आई इस खबर ने पूरे बॉलीवुड को गहरे सदमे में डाल दिया है। असरानी, जिन्हें उनके यादगार कॉमिक किरदारों के लिए जाना जाता है, ने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में एक खास मुकाम बनाया था।
‘शोले’ फिल्म में ‘अंग्रेजों के ज़माने के जेलर’ के रूप में उनका किरदार और उनका वह अमर संवाद “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं!” आज भी लोगों की ज़ुबान पर है। इसके अलावा, ‘आधा तीतर, आधा बटेर…’ और ‘हाय! मैं तो मर गया…’ जैसे उनके अनगिनत संवादों ने उन्हें एक प्रतिष्ठित हास्य कलाकार के रूप में स्थापित किया।
350 से अधिक फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी
असरानी ने अपने तीन दशकों से लंबे करियर में 350 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्मों में ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘गोलमाल’, ‘रोटी’, ‘आज का MLA राम अवतार’, ‘हेरा फेरी’, और ‘भूल भुलैया’ शामिल हैं। उनकी अनूठी अभिनय शैली और लाजवाब कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों का चहेता बनाया।
जयपुर से मुंबई तक का संघर्षमय सफर
1 जनवरी 1941 को जयपुर में जन्मे असरानी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय सीखा। हालांकि, FTII से डिग्री प्राप्त करने के बावजूद, उन्हें मुंबई में काम ढूंढने में काफी संघर्ष करना पड़ा। कई फिल्म निर्माता उन्हें यह कहकर टाल देते थे कि “अभिनय के लिए सर्टिफिकेट की क्या ज़रूरत है? बड़े-बड़े सितारे बिना ट्रेनिंग के काम कर रहे हैं, तुम कौन हो?”
पारिवारिक व्यवसाय को छोड़, अभिनय के जुनून को दी उड़ान
मुंबई में लगातार मिल रही निराशा के बाद, असरानी वापस जयपुर लौट आए। उनके माता-पिता चाहते थे कि वे पारिवारिक कारपेट व्यवसाय संभाले, लेकिन अभिनय का जूनून उन्हें दोबारा FTII खींच लाया। डिग्री पूरी करने के बाद भी, उन्हें दो साल तक कोई काम नहीं मिला।
इंदिरा गांधी बनीं करियर की प्रेरणा
जब तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री इंदिरा गांधी पुणे आईं, तो असरानी और उनके साथी FTII छात्रों ने उनसे अपनी समस्या बताई। उन्होंने बताया कि FTII का सर्टिफिकेट होने के बावजूद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में काम नहीं मिल रहा है। इंदिरा गांधी ने उनकी बात सुनी और मुंबई के निर्देशकों से मिलकर FTII के छात्रों को काम देने की अपील की। इसके बाद, असरानी और जया भादुड़ी को ‘गुड्डी’ जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिलीं। ‘गुड्डी’ की सफलता के बाद, असरानी के करियर में गति आ गई और उन्होंने एक के बाद एक हिट फिल्में दीं। ‘शोले’ ने उन्हें लोकप्रियता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
अंतिम समय तक अभिनय के प्रति समर्पित
84 वर्ष की आयु में भी, असरानी अक्षय कुमार के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। इसी दौरान, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और फेफड़ों में पानी भरने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 20 अक्टूबर को उन्होंने अंतिम सांस ली।
रिलीज होने वाली थीं असरानी की दो अंतिम फिल्में
मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन के साथ असरानी की दो फिल्में, ‘भूत बंगला’ और ‘हैवान’, जल्द ही रिलीज होने वाली थीं। इन फिल्मों में वह अक्षय कुमार के साथ नजर आने वाले थे। असरानी ने अभिनेत्री मंजू बंसल से शादी की थी और उन्होंने साथ में कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया। उनके कोई संतान नहीं थी, लेकिन परिवार के सदस्य हमेशा उनके साथ रहे।
सम्मान और उपलब्धियां
अपने शानदार करियर में, असरानी को कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें शामिल हैं:
- फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड (सर्वश्रेष्ठ हास्य भूमिका)
- लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान
- FTII में योगदान के लिए विशेष गौरव
थिएटर और टेलीविजन में भी छोड़ा अमिट छाप
असरानी ने केवल फिल्मों में ही नहीं, बल्कि थिएटर और टेलीविजन में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उनके धारावाहिकों और नाटकों ने भी दर्शकों को खूब हंसाया और उनका मनोरंजन किया।
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