AMN. आज बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता, कवि और गीतकार गुलजार का जन्मदिन है। आज 92 साल के हो चुके गुजलार का जन्म आज ही के दिन यानी 18 अगस्त 1934 को पाकिस्तान के झेलम जिले के एक छोटे से कस्बे दीना में हुआ था। आज हम आपको गुलज़ार से जुड़ी कुछ ऐसी बातों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। संपूर्ण सिंह कालरा उर्फ गुलज़ार को स्कूल के दिनों से ही कविता और वाद्य संगीत का शौक था। उनका यह शौक कॉलेज के दिनों में ही परवान चढ़ने लगा था और वह अक्सर मशहूर सितार वादक रविशंकर और सरोद वादक अली अकबर खान के कार्यक्रमों में शामिल होते थे।
देश के विभाजन के बाद उनका परिवार अमृतसर में बस गया। अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह मुंबई चले आये। इसके लिए उन्होंने वर्ली के एक गैरेज में कार मैकेनिक के रूप में काम किया। चूँकि गैराज के पास एक पुस्तक विक्रेता था, इसलिए उसे पढ़ने में रुचि हो गई।
खबरों के मुताबिक, एक दिन फिल्म निर्माता बिमल रॉय की कार खराब हो गई। संयोगवश, बिमल रॉय उसी गैराज में पहुंचे जहां गुलज़ार काम करते थे। यहां उन्होंने गुलज़ार और उनकी किताबें देखीं और पूछा कि ये सब कौन पढ़ता है? गुलज़ार ने कहा I. इसके बाद बिमल रॉय ने गुलज़ार को अपना पता दिया और अगले दिन मिलने के लिए बुलाया. जब गुलज़ार अपने कार्यालय पहुंचे, तो बिमल रॉय ने उनसे कहा कि वे कभी भी गैराज में न जाएं। इसके बाद गुलज़ार उनके सहायक बन गये।
गीतकार के तौर पर गुलज़ार को पहला गाना ‘मोरा गोरा अंग लाई’ लिखने का मौका मिला। यह गाना 1963 में रिलीज हुई बिमल रॉय की फिल्म बंदिनी के लिए लिखा गया था। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों के लिए गाने लिखे। 1971 में रिलीज हुई फिल्म ‘मेरे अपने’ के जरिए उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्हें कोशिश, परिचय, अचानक, खुशबू, आंधी, मौसम, किनारा, किताब, नमकीन, अंगूर, इजाज़त, लिबास, लेकिन, माचिस और हु तू तू जैसी कई फिल्मों का निर्देशन करने का मौका मिला।
पीसी:भारतसमाचारटीवी
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