जब सिनेमा जगत थमा, तब आस्था का दामन थाम:
वर्ष 1986, बॉलीवुड की चकाचौंध कुछ समय के लिए थम सी गई थी। फिल्मों के सेट पर ताले लटके थे और इंडस्ट्री हड़ताल की गिरफ्त में थी। ऐसे ही एक मुश्किल दौर में, फिल्म निर्माता बोनी कपूर ने अपने साथियों के साथ आस्था की राह पकड़ी।
वैष्णो देवी की यात्रा, एक नई उम्मीद की किरण:
बोनी कपूर ने इंस्टाग्राम पर एक दुर्लभ तस्वीर साझा की है, जिसमें वे घोड़े पर सवार होकर, इंडस्ट्री के अपने कुछ साथियों के साथ, पवित्र वैष्णो देवी की यात्रा पर निकलते हुए नज़र आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, “साल 1986 में जब इंडस्ट्री में हड़ताल चल रही थी और सेट पर ताले लगे थे, तब हम वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए निकले थे।”
‘होप 86’ – इंडस्ट्री को फिर से जगाने की पहल:
इस आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था। बोनी कपूर बताते हैं, “इस यात्रा के बाद जब इंडस्ट्री दोबारा खुली, तो सिने वर्कर्स की मदद के लिए ‘होप 86’ शो आयोजित किया गया।” यह शो न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन था, बल्कि उन सभी मेहनती हाथों के लिए एक सहारा था जिनकी रोजी-रोटी इंडस्ट्री के थमने से प्रभावित हुई थी।
साथियों का साथ, माता से आस:
तस्वीर में बोनी कपूर के साथ इंडस्ट्री के कई जाने-माने चेहरे दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया, “तस्वीरों में मेरे साथ फिल्म इंडस्ट्री के साथी कलाकार नजर आ रहे हैं, जिनमें पद्मिनी, अशोक, पूनम, मैं और सुरेश (नायडू) बाबू शामिल हैं।” यह समूह सिर्फ एक यात्रा पर नहीं था, बल्कि उनकी प्रार्थनाओं का एक साझा मंच था। वे सब पहाड़ चढ़कर माता वैष्णो देवी से विनती कर रहे थे कि “हड़ताल खत्म हो जाए, इंडस्ट्री फिर से चलने लगे, सभी फिल्मों का काम आगे बढ़े, एसोसिएशन के सदस्यों को उनके मेहनताने में सही बढ़ोतरी मिले, और हड़ताल के कारण रुकी हुई फिल्में दोबारा रिलीज हो सकें।”
यह किस्सा न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव है, बल्कि यह बॉलीवुड के उन संघर्षपूर्ण पलों की गवाही देता है जब रचनात्मकता और रोजगार की राहें मुश्किलों से भरी थीं, और कैसे आस्था व सामूहिक प्रयास ने उन मुश्किलों से पार पाने में मदद की।
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