एक युग का अंत: ‘KGF’ के ‘कासिम चाचा’ हरिश रॉय का निधन, कैंसर से लंबी लड़ाई हारी
कन्नड़ सिनेमा का वो जाना-पहचाना चेहरा, जिसने ‘ओम’ के डॉन रॉय और ‘KGF’ के ‘कासिम चाचा’ के रूप में दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी, आज (6 नवंबर 2025) थायराइड कैंसर से लंबी जंग हार गया। 55 वर्षीय हरिश रॉय का निधन किडवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी में इलाज के दौरान हुआ।
कैंसर ने उनके शरीर पर गहरा वार किया था, जिससे उनका शरीर क्षीण हो गया और चेहरा पहचानना मुश्किल हो गया। इसके बावजूद, अभिनय की दुनिया में वापसी का सपना संजोए वे अंतिम क्षणों तक आशावादी बने रहे। पर, होनी को कुछ और ही मंजूर था। ‘KGF-3’ को लेकर उनके सारे सपने उनकी मृत्यु के साथ ही चकनाचूर हो गए। आइए जानते हैं, इस ‘खलनायक’ के कितने बच्चे थे? उनकी अंतिम इच्छा क्या थी?
कौन थे हरिश रॉय: खलनायकों के स्वर्णिम दौर का अंत, ‘चाचा’ की अमिट छाप
1990 के दशक में ‘ओम’, ‘नल्ला’, ‘जोड़ी हक्की’ जैसी क्लासिक फिल्मों से खलनायकी का ताज पहनने वाले हरिश रॉय ने अपने दमदार संवादों और तीखी नज़रों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। ‘बैंगलोर अंडरवर्ल्ड’, ‘संजू वेड्स गीता’, ‘स्वयंवर’, ‘भोगता’, ‘तायव्वा’, ‘नन्ना कनासिना हूव’ और ‘जाफर अलीअस मुर्गी जाफर’ जैसी कन्नड़ हिट फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने कहानी को एक अलग ही आयाम दिया।
तमिल सिनेमा में भी ‘मिंडम ओरु काधल कधाई’ और ‘राज बहादुर’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। लेकिन, ‘KGF- चैप्टर 1’ और ‘2’ में ‘कासिम चाचा’ का किरदार निभाकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी। एक्टर यश (नवीन कुमार गौड़ा) के रॉकी के साथ उनकी केमिस्ट्री ने सोने की खदानों पर कब्ज़े की जंग को यादगार बना दिया। हरिश ने खुद कहा था, “चाचा बनकर रॉकी को कब्ज़ा दिलाना मेरा सबसे यादगार पल था।” उनकी विरासत 90 के दशक की एक्शन क्लासिक्स से लेकर आज के ब्लॉकबस्टर तक फैली हुई है।
कन्नड़ एक्टर हरिश रॉय प्रोफाइल: जेल से कैंसर तक, फिर भी कभी नहीं झुके
कैमरे के बाहर, हरिश रॉय का जीवन चुनौतियों का पर्याय रहा। उन्होंने पहले व्यापार में कदम रखा, सोने की दुकान चलाई, और फिर 90 के दशक में अभिनय की दुनिया में प्रवेश किया। वर्षों पहले एक केस के चलते जेल जाने का दर्द भी उन्होंने झेला। जब अभिनेता दर्शन को वैसी ही मुश्किल आई, तो हरिश भावुक होकर बोले, “जेल के अनुभव सिखाते हैं, लेकिन हार मत मानो।” अपनी ईमानदारी और विनम्रता से वे इंडस्ट्री में हमेशा सबके चहेते बने रहे। कैंसर से उनकी जंग 2022 से चल रही थी, जो थायराइड से शुरू होकर पेट तक फैल गई थी। इलाज के दौरान उन्होंने दाढ़ी बढ़ाकर चेहरे की सूजन को छिपाने की कोशिश की।
कन्नड़ एक्टर हरिश रॉय नेट वर्थ: कितनी संपत्ति पीछे छोड़ गए हरिश रॉय?
आर्थिक तंगी ने उन्हें कड़ा इम्तिहान लिया। एक इंजेक्शन का खर्च ₹3.55 लाख था, और 63 दिनों के उपचार चक्र में तीन इंजेक्शनों का कुल ₹10.5 लाख का खर्च आया। अनुमान है कि 17-20 इंजेक्शनों पर ₹70 लाख का भारी बोझ पड़ा। इसके बावजूद, वे आशावान बने रहे, “स्वास्थ्य सुधरे तो फिर सेट पर लौटूंगा।” यश, उमापति श्रीनिवास, दर्शन और अनगिनत प्रशंसकों ने उनकी आर्थिक मदद की। उनकी कुल संपत्ति मात्र ₹30-40 लाख आंकी गई थी, जो इलाज के खर्चों में पूरी तरह समाप्त हो गई।
कन्नड़ एक्टर हरिश रॉय लास्ट विश: ‘यश को कॉल करना, वो रॉकी की तरह साथ देंगे’
अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले, हरिश रॉय ने परिवार को एक भावुक संदेश दिया। एक इन्फ्लुएंसर गोपी गौड़ू के वीडियो में उन्होंने खुलासा किया: “यश ने पहले भी मदद की है, लेकिन हर बार कैसे मांगूं? एक इंसान कितना कर सकता है? मैंने उन्हें अपनी बीमारी के बारे में नहीं बताया, लेकिन मैं जानता हूं – वो एक कॉल पर हैं। ‘टॉक्सिक’ की शूटिंग में व्यस्त हैं, फिर भी चाचा के लिए रॉकी पीछे नहीं हटेगा।”
आखिरी हिदायत: उन्होंने परिवार को यश जैसे दोस्तों का सहारा बनाने की सलाह दी। उनकी यह अंतिम इच्छा हृदय को छू लेने वाली है – “अगर कुछ हो जाए, तो बेटों को कहना, वो कभी पीछे नहीं हटेंगे।” कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री गहरे सदमे में है। डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने ट्वीट कर कहा, “हरिश रॉय का जाना सैंडलवुड के लिए अपूरणीय क्षति है।” यह इच्छा ‘KGF’ के ‘चाचा’ की वफादारी को सलाम करती है – रॉकी को कब्ज़ा दिलाने वाली जंग अब परिवार के लिए है।
कन्नड़ एक्टर हरिश रॉय किड्स: कितने बच्चों के पिता थे हरिश रॉय?
हरिश रॉय दो बेटों के पिता थे। एक बेटा रोशन, जो पढ़ाई कर रहा था। उनकी पत्नी ने अंतिम दिनों में उन्हें हौसला दिया और मदद मांगने को कहा। हरिश के जाने से दो बेटे अनाथ से हो गए हैं, लेकिन ‘चाचा’ की यादें उन्हें ताकत देंगी। कन्नड़ सिनेमा ने एक जुझारू कलाकार खो दिया, जो विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हारा नहीं। प्रशंसक सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं: “चाचा के परिवार को, रॉकी की तरह मजबूत रहने की सांत्वना दे रहे हैं।” भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।
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