कालीन भैया’ की प्रेम कहानी: एक रूमाल से शुरू हुआ सफर, जिसने हर मुश्किल को पार किया
नई दिल्ली: बॉलीवुड के मंझे हुए कलाकार पंकज त्रिपाठी, जिन्हें हम ‘कालीन भैया’ के नाम से जानते हैं, अपनी दमदार एक्टिंग से हमेशा दर्शकों का दिल जीतते आए हैं। लेकिन उनकी असल जिंदगी की प्रेम कहानी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। उनकी पत्नी मृदुला त्रिपाठी के साथ उनका रिश्ता, प्यार, ड्रामा और एक खास ‘रूमाल’ के इर्द-गिर्द बुना गया है, जो सुनकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी। तो आइए, इस दिल को छू लेने वाली लव स्टोरी में थोड़ा और गहराई से उतरते हैं…
पहला मिलन और रूमाल का ‘जादुई’ स्पर्श
यह खूबसूरत कहानी 23 मई, 1993 को शुरू हुई, जब पंकज और मृदुला की निगाहें पहली बार मिलीं। यह मुलाकात मृदुला के भाई के तिलक समारोह में हुई थी। मृदुला ने ‘कन्वर्सेशन्स विद अतुल’ पॉडकास्ट में बताया था, “मैंने पंकज को पहले एक तस्वीर में देखा था, लेकिन असल में तिलक के दिन ही मिली। उस वक्त उनकी दाढ़ी बढ़ रही थी, और अब मैं उन्हें चश्मे में देखती हूं। क्या लंबा सफर रहा है!”
लेकिन असली रोमांच तो तब शुरू हुआ, जब एक साधारण से रूमाल ने इन दोनों के दिलों को जोड़ने का काम किया। मृदुला ने हंसते हुए बताया, “हमारी बातचीत एक रूमाल से शुरू हुई। पंकज ने कहा, ‘हाथ धोया, रूमाल चाहिए।’ मैंने रूमाल दिया, और वह हल्का सा हाथ छूने का मौका। बस, उस स्पर्श से दिल में हलचल मच गई।” यह छोटा सा रूमाल उनके प्यार की कहानी का पहला ‘साक्षी’ बन गया।
तस्वीर, सहेलियां और मीठी छेड़छाड़
मृदुला ने खुलासा किया कि उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत तब हुई, जब उन्होंने अपने भाई की शादी से पहले पंकज की एक तस्वीर देखी। उस तस्वीर में पंकज अपने परिवार के साथ थे। मृदुला ने वह फोटो अपनी दो खास सहेलियों को दिखाई, और फिर शुरू हुआ हंसी-मजाक। सहेलियों ने कहा, “बड़ा भाई तो शादीशुदा है, लेकिन छोटा भाई यानी पंकज तुम्हारे साथ अच्छा लगेगा।” बस, यहीं से मृदुला के दिल में पंकज के लिए एक खास जगह बन गई।
‘पंकजी जी’ और पारिवारिक झिझक
पंकज, मृदुला की ननद के भाई थे, तो माहौल काफी पारिवारिक था। मृदुला की मां ने उन्हें पंकज को ‘भैया’ कहने की सलाह दी, लेकिन मृदुला को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने हंसते हुए कहा, “मैंने उन्हें कभी भैया नहीं कहा, बल्कि ‘पंकजी जी’ कहना शुरू किया।” और आज भी, मृदुला अपने पति को ‘पंकजी जी’ कहकर पुकारती हैं – यह उनके रिश्ते की मिठास को दर्शाता है।
प्यार के लिए तोड़ी शादी की डोर
पंकज और मृदुला का रिश्ता धीरे-धीरे गहरा होता गया, लेकिन तब एक मोड़ आया जब मृदुला के परिवार ने उनके लिए दूसरा रिश्ता ढूंढना शुरू किया। और मजेदार बात? इस ‘रिश्ता ढूंढने वाली टीम’ में पंकज भी शामिल थे। जी हां, पंकज अपनी बहन और मृदुला के भाई के साथ मिलकर मृदुला के लिए लड़के देखने जा रहे थे।
एक दिन पंकज ने मृदुला से कहा, “यह लड़का तुम्हें भौतिक सुख दे सकता है।” मृदुला को यह ‘भौतिक सुख’ वाला शब्द समझ नहीं आया, तो पंकज ने समझाया, “यानी मैटेरियल हैप्पीनेस!” बस, यहीं मृदुला को एहसास हुआ कि वह पंकज को खो रही हैं। उन्होंने तुरंत उस रिश्ते से पीछे हटने का फैसला किया। लेकिन पंकज को यह बात बताने में उन्हें महीनों लग गए।
बॉयज हॉस्टल में मृदुला का ‘सत्ते पे सत्ता’ अंदाज़
जब पंकज नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के लिए दिल्ली गए, तो मृदुला ने भी हिम्मत जुटाई और उनके पास चली गईं। और फिर जो हुआ, वह किसी कॉमेडी फिल्म का सीन लगता है। मृदुला कुछ समय तक पंकज के साथ उनके बॉयज हॉस्टल में ही रहीं। मृदुला ने हंसते हुए कहा, “हॉस्टल के लड़के आज भी मुझे चिढ़ाते हैं कि मैं ‘सत्ते पे सत्ता’ वाली भाभी हूं, जो अचानक आ गई और सबको कपड़े पहनने पर मजबूर कर दिया।”
संघर्ष, प्यार और अटूट साथ
2004 में पंकज और मृदुला ने शादी कर ली और मुंबई शिफ्ट हो गए। इसके बाद उनकी बेटी आशी का जन्म हुआ। पंकज के संघर्ष के दिनों में मृदुला ने न सिर्फ घर संभाला, बल्कि आर्थिक बोझ भी उठाया। पंकज हमेशा कहते हैं, “मृदुला मेरे घर की ‘मर्द’ हैं। उनके बिना मैं कुछ नहीं कर पाता।” मृदुला ने ‘द बेटर इंडिया’ को बताया, “वो मुश्किल दिन थे, लेकिन हमें कभी नहीं लगा कि हम एक-दूसरे के लिए कुछ एक्स्ट्रा कर रहे हैं। यह ऐसा था जैसे एक हाथ को दर्द हो, तो दूसरा हाथ मदद के लिए आगे आ जाता है।”
‘कालीन भैया’ का जादू और मृदुला का साथ
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘स्त्री’, ‘लूडो’ और ‘मिर्जापुर’ जैसे प्रोजेक्ट्स से पंकज ने इंडस्ट्री में अपनी खास जगह बनाई। लेकिन उनकी असली ताकत हैं मृदुला, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। एक रूमाल से शुरू हुआ यह रोमांस आज भी उतना ही प्यारा और सच्चा है।
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