संगीता-शेखर की ‘डिस्लेक्सिया’ का सच: 20 साल पुराने घर की डरावनी चोरी

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संगीता-शेखर की 'डिस्लेक्सिया' का सच: 20 साल पुराने घर की डरावनी चोरी
सिनेजीवनः 20 साल पुराने घर में हुई चोरी से डरीं संगीता बिजलानी और शेखर कपूर को है गंभीर 'डिस्लेक्सिया'

डिस्लेक्सिया: शेखर कपूर की छिपी ताकत, फिल्म जगत में रचा इतिहास

मुंबई: मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने हाल ही में एक खुलासा कर सबको चौंका दिया है। उन्होंने बताया कि वे डिस्लेक्सिया से पीड़ित हैं, लेकिन इस स्थिति को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इसे अपनी ताकत में बदला। कपूर ने अपनी बेटी के साथ एक प्यारी सी तस्वीर साझा करते हुए यह जानकारी दी। ‘मासूम’, ‘मिस्टर इंडिया’ और ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी कालजयी फिल्मों के निर्देशक ने इंस्टाग्राम पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए बताया कि कैसे डिस्लेक्सिया ने उनके जीवन को प्रभावित किया और कैसे उन्होंने इससे उबरकर अपनी एक अलग पहचान बनाई।

शेखर कपूर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “कुछ साल पहले मेरी बेटी ने बताया कि उसे डिस्लेक्सिया है। उसके टीचर ने इसे एक बहाना करार देते हुए बताया था कि अक्सर बच्चे परीक्षा में ज्यादा समय पाने के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं। मेरी बेटी ने मुझसे जिद की और एक ऑनलाइन टेस्ट लिया, जिसमें पता चला कि उसे हल्का डिस्लेक्सिया है। लेकिन हैरानी तब हुई जब मुझे पता चला कि मुझे तो गंभीर डिस्लेक्सिया है।” उन्होंने आगे बताया, “मुझे हमेशा से फॉर्म भरने से डर लगता था, तो मैं सोचता था कि मैं आलसी या गैर-जिम्मेदार हूं। लेकिन डिस्लेक्सिया का पता चलने के बाद मुझे समझ आया कि मैं फॉर्म समझ ही नहीं पाता था।”

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद, शेखर कपूर ने हार नहीं मानी। उन्होंने बताया कि वे एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट बने और बाद में फिल्म मेकिंग में अपनी अनूठी शैली से इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। “मेरे लाइन प्रोड्यूसर्स कहते थे कि मैं शेड्यूल नहीं पढ़ता, फिर भी काम समय पर पूरा कर लेता हूं। मैंने हमेशा अपने डिस्लेक्सिया के इर्द-गिर्द काम करने के तरीके ढूंढे।”

कपूर का मानना है कि उनकी फिल्मों के कुछ सबसे रचनात्मक पल शायद डिस्लेक्सिया की वजह से ही संभव हुए। उन्होंने कहा, “मुझे अब लगता है कि कई शानदार रचनात्मक लोग डिस्लेक्सिया के साथ हैं। यह मेरी कमजोरी नहीं, बल्कि मेरी ताकत है।”

डिस्लेक्सिया: एक नजर

डिस्लेक्सिया एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है जो व्यक्ति को पढ़ने, लिखने, शब्दों को बोलने और याद रखने में कठिनाई पैदा करता है। यह स्थिति बच्चों में अधिक आम है, लेकिन किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, डिस्लेक्सिया से पीड़ित व्यक्तियों को जोर से पढ़ने और वर्तनी (स्पेलिंग) में विशेष रूप से मुश्किल होती है। इसे पहले एक विशेष सीखने की समस्या माना जाता था जिसका संबंध कम आईक्यू या सुनने-देखने की समस्याओं से नहीं था। हालाँकि, हालिया शोध ने डिस्लेक्सिया की परिभाषा को और व्यापक बना दिया है, और ‘रोज़ रिव्यू’ के अनुसार, डिस्लेक्सिया किसी भी आईक्यू स्तर पर हो सकता है। इस विकसित होती समझ ने डिस्लेक्सिया को लेकर कुछ भ्रम भी पैदा किए हैं, और भविष्य में इस शब्द के उपयोग को और स्पष्ट करने की आवश्यकता हो सकती है।


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