‘शोले’ का वो अनसुना सच: संजीव कुमार से ज़्यादा इस एक्टर को मिले थे पैसे, धर्मेंद्र की फीस जानकर उड़ जाएंगे होश!

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'शोले' में संजीव कुमार से ज्यादा इस एक्टर को मिले थे पैसे, धर्मेंद्र की फीस जानकर उड़ जाएंगे होश | Sholay Movie Cast Fees Dharmendra Highest Paid Star Amitabh Bachchan Hema Malini Sanjeev Kumar

“शोले” का जादू: जब धर्मेंद्र ने कमाए थे सबसे ज़्यादा, पर आज के हिसाब से थे ‘कम’
मनोरंजन | लेखक: शशांक मणि पांडेय | प्रकाशित: गुरुवार, 27 नवंबर, 2025, 17:40 [IST]

भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1975 एक ऐसा मील का पत्थर है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसी वर्ष आई फिल्म “शोले” ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई, बल्कि आने वाले दशकों के लिए हिंदी फिल्म उद्योग की दिशा भी तय कर दी। रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित यह फिल्म आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित कृतियों में शुमार है।

कम बजट, ज़बरदस्त कमाई

लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी “शोले” ने अपने दौर में 15 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर इतिहास रच दिया। अगर आज के संदर्भ में देखें तो यह रकम करोड़ों के बराबर है। फिल्म के अविस्मरणीय किरदार, दमदार संवाद और यादगार संगीत ने इसे एक ऐसा दर्जा दिया है जिसे आज भी तीन पीढ़ियाँ एक साथ पसंद करती हैं।

कलाकारों की फीस: कुछ दिलचस्प खुलासे

उस समय के हिसाब से फिल्म का बजट भले ही बड़ा रहा हो, लेकिन आज के मानकों के मुकाबले कलाकारों की फीस काफी कम थी। उस दौर में सबसे अधिक फीस धर्मेंद्र को मिली, जो लगभग 1.5 लाख रुपये थी। इसके बाद संजीव कुमार को ‘ठाकुर’ की प्रतिष्ठित भूमिका के लिए 1 लाख 25 हजार रुपये मिले। अमिताभ बच्चन, जो उस समय तेजी से उभर रहे थे, ने ‘जय’ के किरदार के लिए 1 लाख रुपये का पारिश्रमिक लिया। वहीं, ‘बसंती’ के रूप में दर्शकों का दिल जीतने वाली हेमा मालिनी को 75 हजार रुपये दिए गए।

दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के सबसे यादगार खलनायक, गब्बर सिंह का किरदार निभाने वाले अमजद खान को महज़ 50 हजार रुपये मिले थे। कम फीस पाने के बावजूद, उनका किरदार भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे यादगार विलेनों में से एक बन गया। सबसे कम फीस जया बच्चन को मिली, जो लगभग 35 हजार रुपये थी। हालांकि उनका स्क्रीन टाइम सीमित था, लेकिन कहानी में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

एक फिल्म जिसने बदल दी सिनेमा की परिभाषा

“शोले” सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक संपूर्ण अनुभव थी। विशाल सेट, सशक्त किरदार, ज़हन में बस जाने वाले संवाद और रोमांच से भरी पटकथा ने इसे एक ‘मास्टरपीस’ बना दिया। भले ही उस समय कलाकारों की फीस कम रही हो, लेकिन फिल्म की अपार सफलता ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।


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