टेनिस कोर्ट से कानूनी कोर्ट तक छिड़ी जंग: एआईटीए चुनावों पर सोमदेव और पुरव राजा को झटका, हाईकोर्ट ने बरकरार रखा अपना फैसला
(अमनप्रीत सिंह)
नयी दिल्ली: भारतीय टेनिस प्रशासन में चल रही खींचतान के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने डेविस कप स्टार सोमदेव देववर्मन और युगल विशेषज्ञ पुरव राजा की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के चुनाव मानदंडों में बदलाव की मांग की गई थी। इस फैसले के साथ ही अब सभी संबद्ध राज्य संघों के लिए मतदान का रास्ता साफ हो गया है, चाहे उन्होंने फिलहाल राष्ट्रीय खेल संहिता का पूर्ण रूप से पालन किया हो या नहीं।
न्यायमूर्ति तेजस कारिया और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अपीलकर्ता उन मुद्दों को फिर से कुरेदने की कोशिश कर रहे हैं, जो पहले ही आपसी सहमति से सुलझा लिए गए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई प्रत्यक्ष गलती नहीं मिली है जिसके लिए आदेश पर पुनर्विचार करना जरूरी हो। यह मामला 18 जून के उस अंतरिम आदेश से जुड़ा है, जो एकल न्यायाधीश के 27 अप्रैल 2024 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर आधारित था।
राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम-2025 और खेल प्रशासन नियम-2026 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्ष एक अंतरिम व्यवस्था पर सहमत हुए थे। इस योजना के अनुसार, एआईटीए पहले अपने संविधान और उपनियमों में संशोधन कर उन्हें नए खेल कानून के अनुरूप बनाएगा। इसके बाद, 30 सितंबर 2026 तक कार्यकारी समिति के चुनाव संपन्न कराए जाएंगे। 18 जून के आदेश में इन संशोधनों पर विस्तृत चर्चा के लिए एक असाधारण आम बैठक (ईजीएम) बुलाने का भी निर्देश दिया गया था।
अदालत के आदेश की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यह है कि सभी संबद्ध राज्य संघों को ईजीएम और आगामी चुनावों में मतदान की अनुमति होगी। मतदान के समय उनका खेल अधिनियम के पूर्ण अनुपालन में होना अनिवार्य नहीं रखा गया है। हालांकि, नई निर्वाचित कार्यकारी समिति की यह जिम्मेदारी होगी कि वह 31 दिसंबर 2026 तक सभी राज्य संघों से नियमों का पालन सुनिश्चित कराए। हालिया ईजीएम में राज्यों ने हिस्सा लिया था, जहां एआईटीए ने अपने संविधान को राष्ट्रीय खेल संहिता के सांचे में ढाला।
दूसरी ओर, देववर्मन और राजा ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि राज्य संघों को एआईटीए चुनाव से पहले ही अपने संविधान में संशोधन करने और खेल नियमों व अंतरराष्ट्रीय चार्टर का पालन करते हुए स्वयं के चुनाव कराने के निर्देश दिए जाएं। लेकिन अदालत के ताजा रुख ने फिलहाल महासंघ की चुनावी प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
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