संसद के शीतकालीन सत्र में गरमाई सियासत: अधीर रंजन चौधरी ने पीएम मोदी को बताया ‘नाटककार’, सत्र के हंगामेदार होने के संकेत
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष पर की गई “नाटक वाली” टिप्पणी को लेकर तीखा पलटवार किया है। चौधरी का कहना है कि प्रधानमंत्री स्वयं एक महान नाटककार हैं और इस कला में उनका कोई मुकाबला नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर यह प्रतिक्रिया शीतकालीन सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति के अभिभाषण के तुरंत बाद आई, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों से जनता के हित में एक उत्पादक सत्र सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।
‘नाटक’ पर पीएम की टिप्पणी, विपक्ष की ‘अशांति’ पर कटाक्ष
अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि हालिया बिहार चुनावों में मिली हार के बाद वे “अशांत” दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे मतभेदों को एक तरफ रखकर सत्र को हंगामेदार न बनने दें, जैसा कि मानसून सत्र में हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं सभी से अनुरोध करूँगा कि वे अपने मुद्दों पर विचार करें। नाटक करने की बहुत गुंजाइश है, जो नाटक करना चाहे कर सकता है। यहाँ नाटक नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए… लेकिन यहाँ ज़ोर नीतियों पर होना चाहिए, नारों पर नहीं।”
‘सकारात्मक सोच’ और ‘मज़बूत मुद्दे’ पर ज़ोर
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि नकारात्मकता का भले ही राजनीतिक लाभ हो, लेकिन राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक सोच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष से संसद में चुनावी हताशा से उपजे नारों के बजाय मज़बूत और प्रासंगिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वे उम्मीद कर रहे थे कि विपक्ष बिहार चुनाव के नतीजों से उबर जाएगा, लेकिन उन्हें लगता है कि वे अभी भी “अस्थिर” हैं। उन्होंने कहा, “विपक्ष को संसद में मज़बूत और प्रासंगिक मुद्दे भी उठाने चाहिए… कल ऐसा लग रहा था कि हार ने उन्हें स्पष्ट रूप से प्रभावित किया है।”
सहयोग का आह्वान, सत्र के ‘परिणाम’ पर ध्यान
सभी राजनीतिक दलों से सहयोग का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि शीतकालीन सत्र हार के बाद की हताशा या जीत के बाद के अहंकार का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए। इसके बजाय, उन्होंने कहा कि संसद को देश के लिए सोचने, करने और परिणाम देने के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
इस बीच, भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) के सदस्यों ने लोकसभा और राज्यसभा के लगभग तीन सप्ताह के सत्र से पहले विपक्षी गुट की रणनीति पर चर्चा करने के लिए बैठक की, जिससे सत्र की गरमाहट का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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