एयर इंडिया हादसे पर सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान: पायलट की गलती पर सवाल, जाँच की माँग
12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे ने जहाँ पूरे देश को झकझोर दिया था, वहीं अब इस मामले ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया है। शीर्ष अदालत ने इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना की निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच की माँग वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB) द्वारा जारी निष्कर्षों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पायलट की गलती को दुर्घटना का एकमात्र कारण बताने वाले वृत्तांत को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले की गहराई से जाँच सुनिश्चित करेगा।
एनजीओ की प्रमुख माँगें: पारदर्शिता और जवाबदेही
इस मामले में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा दायर जनहित याचिका में कई महत्वपूर्ण माँगें उठाई गई हैं, जो जाँच में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं:
- उड़ान डेटा रिकॉर्डर (FDR) की पूरी जानकारी का खुलासा: एनजीओ चाहता है कि उड़ान के दौरान दर्ज की गई सभी महत्वपूर्ण डेटा सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में मदद मिल सके।
- कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की सटीक प्रतिलिपि: कॉकपिट में हुई बातचीत की सटीक प्रतिलिपि, जिसमें समय का भी उल्लेख हो, सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि पायलटों के बीच हुई बातचीत से कुछ अहम सुराग मिल सकें।
- तकनीकी खराबी की सभी रिपोर्टों का सार्वजनिक प्रकाशन: इलेक्ट्रॉनिक फॉल्ट रिकॉर्डिंग और किसी भी अन्य तकनीकी खराबी से संबंधित सभी रिपोर्टों को सार्वजनिक करने की माँग की गई है, ताकि यह पता चल सके कि क्या विमान में कोई यांत्रिक गड़बड़ी थी।
अदालत की निगरानी में जाँच की माँग
एनजीओ ने यह भी दावा किया है कि प्रारंभिक जाँच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नज़रअंदाज़ किया गया है। इनमें ईंधन स्विच की खराबी, विद्युत दोष, रैम एयर टर्बाइन (RAT) का अनपेक्षित संचालन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक विसंगतियाँ शामिल हैं।
याचिका में एक और गंभीर चिंता हितों के टकराव को लेकर उठाई गई है। एनजीओ ने इंगित किया है कि जाँच दल में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारी शामिल हैं, जिन पर स्वयं विमानन सुरक्षा में लापरवाही के आरोप हैं। ऐसे में, एनजीओ ने ज़ोर देकर कहा है कि यह जाँच पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए और अदालत द्वारा इसकी कड़ी निगरानी की जानी चाहिए, ताकि दुर्घटना के पीछे की सच्चाई निष्पक्ष रूप से जनता के सामने आ सके।
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