असम की जनसंख्या नीति में बड़ा बदलाव: इन समुदायों को मिलेगी तीन बच्चों तक की छूट
असम सरकार ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए अपनी दो-बच्चों की नीति में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), चाय बागान, मोरन और मटक समुदायों को अब तीन बच्चों तक की छूट दी गई है।
क्या हैं नए नियम?
जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, इन विशेष समुदायों के सदस्य, जिनके तीन बच्चे तक हैं, अब सरकारी नौकरी, चुनाव लड़ने और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों के पात्र होंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव, पतिबंडला अशोक बाबू द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश ने कुछ चुनिंदा समुदायों के लिए दो बच्चों की शर्त को समाप्त कर दिया है और इसे तीन बच्चों तक शिथिल कर दिया है। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
“जनसंख्या और महिला सशक्तीकरण नीति (संशोधन), 2025” की घोषणा
असम के राज्यपाल ने “असम की जनसंख्या और महिला सशक्तीकरण नीति (संशोधन), 2025” की घोषणा करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। यह घोषणा दर्शाती है कि असम की जनसंख्या एवं महिला सशक्तीकरण नीति, 2017 में तदनुसार संशोधन किया गया है।
यह फैसला क्यों लिया गया?
राज्य मंत्रिमंडल ने 23 अक्टूबर को ही एसटी, चाय बागान, मोरन और मटक समुदायों के लिए सरकारी नौकरी हेतु दो-बच्चों के मानदंड को समाप्त करने का निर्णय लिया था। शुक्रवार को जारी अधिसूचना इसी फैसले को अमली जामा पहनाती है।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए कहा था कि इन समुदायों को विलुप्त होने से बचाने के उद्देश्य से उन्हें जनसंख्या नियंत्रण मानदंडों के दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने चिंता व्यक्त की थी कि यदि वर्तमान नीति पर अड़े रहे, तो इन समुदायों की विशिष्ट पहचान खो सकती है और वे अगले 50 वर्षों में धीरे-धीरे विलुप्त हो सकते हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि असम लोक सेवा (सीधी भर्ती में छोटे परिवार के मानदंडों का अनुप्रयोग) नियम, 2019 के अनुसार, दो-बच्चे की नीति जनवरी 2021 से लागू की गई थी। अब इस नए संशोधन से इन समुदायों को एक बड़ी राहत मिली है।
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