पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट का अनोखा आदेश, अब याचिकाकर्ता ही लगाएंगे 25-25 फलदार पेड़

By
PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
- Editor
4 Min Read
पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट का अनोखा आदेश, अब याचिकाकर्ता ही लगाएंगे 25-25 फलदार पेड़

सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों की कटाई को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐसा आदेश दिया, जिसने पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं रखा। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को भी पेड़ लगाने का निर्देश देकर एक नया संदेश दिया।

पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त

मध्य प्रदेश में सड़क चौड़ीकरण और नए हाईवे निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं आनंद और विवेक कुमार शर्मा ने आरोप लगाया था कि विकास कार्यों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन उसके अनुपात में नए पौधे नहीं लगाए जा रहे।

उनकी चिंता सिर्फ पेड़ों की संख्या तक सीमित नहीं थी। उनका कहना था कि लगातार घटती हरियाली पर्यावरणीय संतुलन, तापमान और स्थानीय पारिस्थितिकी पर सीधा असर डाल सकती है।

2015 के नोटिफिकेशन को भी चुनौती

याचिका में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 24 सितंबर 2015 को जारी एक नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इसे पर्यावरण के लिहाज से नुकसानदेह बताया था।

इस मामले में हाईकोर्ट की फुल बेंच पहले ही विवादित नोटिफिकेशन को रद्द कर चुकी है। मौजूदा सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि 2019 में याचिका दायर होने के बाद कई सड़कें चौड़ी हो चुकी हैं और नए हाईवे भी बन चुके हैं।

आंकड़ों की कमी बनी अहम वजह

अदालत के सामने एक बड़ी समस्या यह रही कि अब तक यह स्पष्ट डेटा उपलब्ध नहीं था कि इस अवधि में कुल कितने पेड़ काटे गए और उनके बदले कितने पौधे लगाए गए।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता इस विषय को आगे उठाना चाहते हैं, तो उन्हें ठोस आंकड़ों और प्रमाणित जानकारी के साथ दोबारा अदालत का रुख करना होगा। इससे न्यायिक प्रक्रिया में तथ्यात्मक डेटा की अहमियत भी साफ होती है।

याचिकाकर्ताओं को ही लगानी होगी जिम्मेदारी

मामले का सबसे दिलचस्प पहलू अदालत का अंतिम निर्देश रहा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने दोनों याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में नगर निगम द्वारा चिह्नित स्थानों पर 25-25 फलदार पेड़ लगाने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही पौधे लगाए जाने के बाद उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा गया है। यानी जनहित की मांग करने वालों को अब पर्यावरण संरक्षण में खुद भी प्रत्यक्ष योगदान देना होगा।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन

सड़कें, हाईवे और बुनियादी ढांचा किसी भी राज्य के विकास के लिए जरूरी हैं। लेकिन विकास की कीमत यदि लगातार घटती हरियाली के रूप में चुकानी पड़े, तो उसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है।

हाईकोर्ट का यह आदेश इसी संतुलन की ओर संकेत करता है। पेड़ लगाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और जीवित रहने की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

अदालत का संदेश सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला पर्यावरण से जुड़े मामलों में एक व्यापक संदेश देता है। जनहित केवल अदालत में याचिका दायर करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। जिस समस्या को लेकर आवाज उठाई जा रही है, उसके समाधान में व्यक्तिगत भागीदारी भी जरूरी है।

25-25 फलदार पेड़ लगाने का आदेश भले ही संख्या में छोटा लगे, लेकिन इसका संदेश बड़ा है—हरियाली बचाने की जिम्मेदारी किसी एक विभाग या सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर हिस्से की है। विकास की राह तभी टिकाऊ होगी, जब उसके साथ प्रकृति की सुरक्षा भी कदम से कदम मिलाकर चले।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *