अटल योद्धा, अब वीरगति को, स्मृतियों में अमर

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mig 21: अलविदा मिग 21

मिग-21: उड़ान का एक स्वर्णिम अध्याय, अब विदाई की बेला

भारतीय वायुसेना का वो जांबाज, जिसने 1950 के दशक में रूस की धरती से उड़ान भरी और फिर आसमान में अपनी रफ्तार और अदम्य साहस की गाथा लिखी – मिग-21! यह सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि शौर्य, जीत और देशसेवा का प्रतीक रहा है। ध्वनि की गति को चीरने की क्षमता रखने वाला यह सुपरसोनिक लड़ाकू विमान, 1963 में भारतीय वायुसेना के गौरवशाली बेड़े का हिस्सा बना और 26 सितंबर 2025 को, छह दशकों की अटूट सेवा के बाद, यह वीर योद्धा आखिरकार रिटायर हो रहा है। शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम में, वायुसेना अपने इस अजीज साथी को भावुक विदाई देगी। बीकानेर एयरबेस पर अभी भी मिग-21 बाइसन की दो स्क्वाड्रन तैनात हैं, लेकिन अब इनकी जगह स्वदेशी सुपरहीरो, तेजस मार्क 1A ले रहा है।

भारतीय सेना का बेमिसाल योद्धा: शौर्य और जीत की अनूठी दास्तान

मिग-21 बाइसन, अपने समय का एक बेजोड़ सुपरसोनिक फाइटर जेट था, जिसकी गर्जना और बिजली सी रफ्तार दुश्मनों के होश उड़ा देती थी। इसने दो बार पाकिस्तान को रणभूमि में धूल चटाने में निर्णायक भूमिका निभाई। 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में, विशेषकर 1971 की जंग में, इसने पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया। 14 दिसंबर 1971 को ढाका में मिग-21 द्वारा राज्यपाल के आवास पर किया गया हमला, जिसने अगले दिन राज्यपाल के इस्तीफे और 16 दिसंबर को पाकिस्तान के आत्मसमर्पण का मार्ग प्रशस्त किया, इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। 1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में भी इसने अपनी महत्ता साबित की, जब इसने भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे एक पाकिस्तानी अटलांटिक विमान को मार गिराया। और 2019 में, इसी मिग-21 ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान के हाथों एक पाकिस्तानी F-16 को ढेर कर एक बार फिर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया।

वायुसेना प्रमुख का अंतिम सफ़र

25 सितंबर 2025 को, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने मिग-21 से अपनी अंतिम उड़ान भरी। इस ऐतिहासिक क्षण पर उन्होंने कहा, "मिग-21, 1960 के दशक से ही भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान रहा है, और आज भी हम इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। यह इतिहास के सबसे अधिक निर्मित सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों में से एक है, जिसे 60 से अधिक देशों में 11,000 से ज्यादा विमानों के रूप में इस्तेमाल किया गया है।"

मिग-21 की विदाई: एक युग का अंत

60 साल से अधिक की अविश्वसनीय सेवा के बाद, 26 सितंबर को मिग-21 भारतीय वायुसेना से विदा ले रहा है। यह भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए एक अत्यंत भावुक क्षण है। लगभग 60 वर्षों तक भारतीय वायुसेना की रीढ़ रहा यह विमान, पायलटों के लिए एक भरोसेमंद साथी साबित हुआ। इसकी सबसे बड़ी खासियत थी हवा में हैरतअंगेज करतब दिखाने की क्षमता और इसकी बिजली सी रफ्तार। एक समय ऐसा भी था जब इसकी क्षमता का इतना लोहा माना जाता था कि इजरायल ने इसे चोरी करवाने का प्रयास भी किया था। हालांकि, समय के साथ, मिग-21 पुराना पड़ता गया और हादसों की संख्या भी बढ़ी। 1971 से अब तक लगभग 400 मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं, जिनमें लगभग 200 पायलटों ने अपनी जान गंवाई, और दर्जनों आम नागरिक भी इसके हादसों का शिकार हुए। इन हादसों के कारण इसे कई बार "उड़ता ताबूत" भी कहा गया।

आज मिग की आखिरी उड़ान: चंडीगढ़ के आसमान में इतिहास का अंतिम अध्याय

आज, 26 सितंबर को, चंडीगढ़ के आसमान में मिग-21 अपनी अंतिम उड़ान भरेगा। 62 वर्षों की निस्वार्थ सेवा और अपनी अविश्वसनीय रफ्तार के बाद, यह विमान वायुसेना के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बनकर रह जाएगा। यह ऐसा इतिहास होगा जिसकी कहानियाँ हमेशा हमें देश के प्रति उसके योगदान का अहसास कराती रहेंगी। इसकी वीरता, रफ्तार, कलाबाजी की क्षमता और रडार को चकमा देने की कला इसे हमेशा एक बेमिसाल विमान बनाए रखेगी। संसार का नियम है कि हर शुरुआत का अंत होता है। प्यार, मोहब्बत, शोहरत, सब कुछ इस दुनिया में हमेशा नहीं रहता। जैसे आज मैं यहां हूँ, कल कोई और था, उसी तरह यह भी एक दौर था, और वह भी एक दौर था।


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