अयोध्या में ‘दलित’ पहचान की कीमत? सपा सांसद ने उठाया सवाल।

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अयोध्या में 'दलित' पहचान की कीमत? सपा सांसद ने उठाया सवाल।
अयोध्या में 'दलित' होने का खामियाजा? सपा सांसद अवधेश प्रसाद का आरोप, खड़ा किया सवाल

फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर ध्वजारोहण में न बुलाए जाने पर जताई आपत्ती, दलित समुदाय से होने का बताया कारण

अयोध्या: फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने मंगलवार को एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अयोध्या में भव्य राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया, क्योंकि वे दलित समुदाय से हैं। प्रसाद ने इस कदम को “संकीर्ण मानसिकता” करार देते हुए कहा कि भगवान राम सभी के हैं और इस तरह का भेदभाव आस्था का अपमान है।

सांसद ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण के लिए नहीं, बल्कि देश में “सम्मान, समानता और संविधान के सम्मान” के लिए है। उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया।

यह विवाद उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊंचे शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। यह समारोह मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक था।

‘धर्म ध्वज’ की विशेष महत्ता

मंदिर के शिखर पर फहराया गया ‘धर्म ध्वज’ अपने आप में विशेष महत्व रखता है। समकोण त्रिभुजाकार, 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा यह ध्वज तीन पवित्र प्रतीकों से सुशोभित है: ॐ, सूर्य और कोविदर वृक्ष। प्रत्येक प्रतीक का सनातन परंपरा में गहरा आध्यात्मिक अर्थ है।

  • ॐ: यह शाश्वत आध्यात्मिक ध्वनि का प्रतीक है।
  • सूर्य: यह भगवान राम के सूर्यवंश का प्रतिनिधित्व करता है।
  • कोविदर वृक्ष: यह मंदार और पारिजात वृक्षों का एक संकर वृक्ष है, जिसे ऋषि कश्यप द्वारा निर्मित माना जाता है। यह प्राचीन वनस्पति संकरण को दर्शाता है।

“सदियों के घावों” का मरहम, “सभ्यतागत संकल्प” की पूर्ति

‘ध्वजारोहण’ समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूरा भारत और विश्व “राममय” हो गया है। उन्होंने राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना को “सदियों के घावों” को भरने वाला और 500 वर्षों से जीवित रखे गए एक “सभ्यतागत संकल्प” की पूर्ति का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए इस पल को “नए युग की शुरुआत” बताया।

हालांकि, सांसद अवधेश प्रसाद का बयान इस भव्य समारोह के बीच एक संवेदनशील मुद्दा उठाता है, जो समाज में समानता और समावेशिता के महत्व पर प्रकाश डालता है।


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