जब अयोध्या में राम मुस्कुराए, तो कृष्ण क्यों न मुस्कुराएं? सीएम मोहन यादव का गूंजता सवाल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक ऐसी बात कही है जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनमानस तक में हलचल मचा दी है। वृंदावन में आयोजित एक भागवत कथा के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे सीएम यादव ने बेबाकी से कहा, “जब भगवान राम अयोध्या में अपने मंदिर में मुस्कुरा रहे हैं, तो अगर भगवान कृष्ण भी मुस्कुराएं तो इसमें क्या गलत है?”
कैबिनेट मंत्री राकेश शर्मा द्वारा वृंदावन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और शहीदों की स्मृति में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सीएम यादव ने कहा, “हमने अयोध्या में रामलला को मुस्कुराते हुए देखा है। यह बदलता युग है। जब राम लला मुस्कुरा रहे हैं, तो क्या गलत है, कृष्ण कन्हैया भी मुस्कुराएं।”
सीएम यादव ने आगे कहा, “यह भी आनंद आना चाहिए। ध्वनि चारों दिशाओं से आ रही है।” उन्होंने किसी का नाम लिए बिना उन लोगों पर भी कटाक्ष किया जो शायद इस बदलती तस्वीर को स्वीकार नहीं कर पा रहे। उन्होंने कहा, “जो बहरे हैं वे अपने कान ठीक कर लें, जिनकी आंखों में समस्या है वे साफ देख लें…. हम ज़्यादा दूर नहीं हैं।”
हालांकि सीएम मोहन यादव ने सीधे तौर पर मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद-श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मामले का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन उनकी यह टिप्पणी सीधे तौर पर उसी संदर्भ में देखी जा रही है। गौरतलब है कि यह मामला फिलहाल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। हिंदू पक्ष जहां शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर जमीन पर कब्जा करने की मांग कर रहा है, वहीं मुस्लिम पक्ष 1968 के समझौते और उपासना स्थल अधिनियम 1991 का हवाला देकर मस्जिद की कानूनी वैधता पर ज़ोर दे रहा है।
सीएम यादव की यह बेबाक टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में धार्मिक स्थलों को लेकर एक नई बहस छिड़ी हुई है। उनका यह बयान जहां करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं यह उन सवालों को भी हवा देता है जो लंबे समय से अनसुलझे हैं। “राम मुस्कुराए, तो कृष्ण क्यों न मुस्कुराएं?” – यह सवाल अब मथुरा की दिशा तय करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है।
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