बलूचिस्तान में उतर सकती है चीनी सेना? मीर यार बलोच का जयशंकर को पत्र, CPEC पर दी बड़ी चेतावनी

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पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग. ईमेज सोर्स- @SpoxCHN_MaoNing

Balochistan China Military Deployment: नए साल के पहले ही दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाने वाला एक पत्र सामने आया. यह पत्र लिखा है बालोच नेता मीर यार बलोच ने और इसे संबोधित किया गया है भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी यह पत्र साझा किया. इसमें उन्होंने दावा किया कि आने वाले कुछ महीनों में चीन, पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में अपनी सेना उतार सकता है. उनके मुताबिक, चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी बलूचिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन सकती है.

Balochistan China Military Deployment in Hindi: चीन-पाक दोस्ती पर बालोच नेताओं की चिंता

मीर यार बलोच ने पत्र में कहा कि बलूच प्रतिनिधि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को खतरनाक मानते हैं. उनका कहना है कि यह दोस्ती सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब जमीन पर असर दिखाने लगी है. उन्होंने लिखा कि यह गठजोड़ बलूचिस्तान की सुरक्षा, आजादी और भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है.

79 सालों से दमन का आरोप

अपने पत्र में मीर यार बलोच ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान पिछले 79 सालों से पाकिस्तान के कब्जे में है. इस दौरान वहां के लोगों को राज्य की हिंसा, मानवाधिकारों के उल्लंघन और सरकारी दबाव का सामना करना पड़ा है. उन्होंने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस हालात को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि बलूचिस्तान को स्थायी शांति और अपनी पहचान मिल सके.

अवेयर मीडिया नेटवर्क

CPEC पर फोकस: आखिरी दौर में पहुंची परियोजना

मीर यार बलोच ने अपने पत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है. CPEC, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेल्ट एंड रोड पहल का अहम हिस्सा है और इसका बड़ा हिस्सा बलूचिस्तान से होकर गुजरता है. मीर यार बलोच का दावा है कि इसी परियोजना के जरिए चीन और पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं.

चीनी सेना की तैनाती की चेतावनी

पत्र का सबसे गंभीर हिस्सा यहीं आता है. मीर यार बलोच ने दावा किया कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और आजादी के लिए लड़ने वाली ताकतों को मजबूत नहीं किया गया और उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले कुछ महीनों में चीन अपनी सेना बलूचिस्तान में तैनात कर सकता है. (Balochistan China Military Deployment Mir Yar Baloch Letter Jaishankar in Hindi)

भारत और पूरे इलाके पर असर की बात

मीर यार बलोच ने लिखा कि अगर स्थानीय लोगों की मर्जी के बिना बलूचिस्तान में चीनी सैनिकों की मौजूदगी होती है, तो इसके नतीजे सिर्फ बलूचिस्तान तक सीमित नहीं रहेंगे. उन्होंने दावा किया कि यह हालात भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. उनके मुताबिक, 60 मिलियन बलूच लोगों की इच्छा के खिलाफ कोई भी विदेशी सैन्य मौजूदगी गंभीर संकट पैदा कर सकती है. चीन और पाकिस्तान पहले भी कई बार इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं. दोनों देशों का कहना है कि CPEC पूरी तरह आर्थिक परियोजना है, इसका कोई सैन्य मकसद नहीं है. वे लगातार यह दावा करते रहे हैं कि इस परियोजना के तहत किसी तरह की सैन्य तैनाती की योजना नहीं है.

CPEC पर भारत का साफ रुख

भारत सरकार का रुख इस मुद्दे पर शुरू से साफ रहा है. भारत का कहना है कि CPEC भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से होकर गुजरती है. इस साल राज्यसभा में विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में कहा था कि भारत ने इस परियोजना पर लगातार आपत्ति जताई है और CPEC का किसी तीसरे देश तक विस्तार पूरी तरह अस्वीकार्य है.

ऑपरेशन सिंदूर की सराहना

मीर यार बलोच ने अपने पत्र में भारत सरकार की कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई थी. यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में उठाया गया, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. उनके मुताबिक, यह कदम मोदी सरकार की सख्त और साफ नीति को दिखाता है. इस पूरे मामले पर फिलहाल भारत सरकार, चीन और पाकिस्तान में से किसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मीर यार बलोच के ये सभी बयान और आरोप उनके पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित हैं.


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